Bollywood: ईविल डेड बर्न में दिखेगा खौफ का नया मंजर खूनी संघर्ष और राक्षसी शक्तियों के साथ डराने आ गई नई फिल्म

मुंबई। हॉरर फिल्मों की दुनिया में ‘ईविल डेड’ एक ऐसा नाम है जिससे सिनेप्रेमी दशकों से थर्राते रहे हैं। 1981 में सैम राइमी द्वारा शुरू की गई यह फ्रेंचाइजी अब अपने नए अध्याय ‘ईविल डेड बर्न’ के साथ वापस आई है। इस बार फ्रांसीसी निर्देशक सेबेस्टियन वानिचेक ने कमान संभाली है, जिन्होंने इस कल्ट हॉरर सीरीज को एक नया और अधिक क्रूर स्वरूप देने की कोशिश की है। यह फिल्म न केवल डराती है, बल्कि खून-खराबे की सीमाओं को भी पार करती नजर आती है।

कहानी और खौफनाक शुरुआत
फिल्म की कहानी ‘ईविल डेड’ की परंपरा को कायम रखते हुए रोंगटे खड़े कर देने वाले दृश्यों से शुरू होती है। मुख्य पात्र एलिस अपने पति विलियम को एक भयानक दुर्घटना में खो देती है। इस दुर्घटना के पीछे ‘डेडाइट’ यानी एक दुष्ट राक्षसी शक्ति का हाथ होता है, जिसका मकसद केवल विनाश और इंसानी आत्माओं पर कब्जा करना है। हालांकि, विलियम का परिवार उसे एक आदर्श बेटे और पति के रूप में देखता है, लेकिन एलिस के लिए हकीकत कुछ और थी। वह विलियम के हिंसक और अत्याचारी व्यवहार का शिकार रही थी।

विलियम के अंतिम संस्कार के बाद एलिस उसके परिवार के साथ एक बेहद पुराने और जर्जर पुश्तैनी मकान में पहुंचती है। यहाँ विलियम के माता-पिता एडगर और सुसान, भाई जोसेफ और अन्य सदस्य भी साथ होते हैं। पुराने मकान की जर्जर दीवारें जल्द ही खौफनाक राज उगलने लगती हैं और एक प्राचीन दुष्ट शक्ति सक्रिय हो जाती है।

जादुई कटार और मौत का खेल
कहानी में रोमांच तब बढ़ता है जब जोसेफ को एक प्राचीन जादुई कटार मिलती है। यह कटार उनके दादा ने खोजी थी, जो राक्षसी शक्तियों को खत्म करने का एकमात्र जरिया थी। जैसे ही यह कटार मिलती है, आसपास के डेडाइट्स इसकी मौजूदगी को महसूस कर लेते हैं और परिवार पर हमला बोल देते हैं। इसके बाद शुरू होता है एक-एक कर परिवार के सदस्यों के राक्षसों में तब्दील होने का सिलसिला। विलियम की रूह का इस्तेमाल कर ये शक्तियां पूरे परिवार की आत्माओं पर कब्जा करने के लिए बेताब हो जाती हैं।

निर्देशन और तकनीकी पक्ष
निर्देशक सेबेस्टियन वानिचेक और लेखक फ्लोरेंट बर्नार्ड ने केवल हॉरर पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि घरेलू हिंसा और पीढ़ियों से चले आ रहे मानसिक आघात जैसे गंभीर विषयों को भी फिल्म का हिस्सा बनाया है। फिल्म दिखाती है कि जब कोई व्यक्ति भावनात्मक रूप से कमजोर होता है, तो बुराई उस पर सबसे जल्दी हावी होती है। हालांकि, फिल्म में हिंसा और अंग-भंग के दृश्य इतने वीभत्स हैं कि वे कई बार दर्शकों को असहज कर सकते हैं।

फिल्म का एक दृश्य जहाँ कार की सीट बेल्ट और एयरबैग जैसे सुरक्षा उपकरण ही मौत के हथियार बन जाते हैं, निर्देशक की कल्पनाशीलता को दर्शाता है। सोहैला याकूब ने एलिस के रूप में दमदार अभिनय किया है, वहीं हंटर डूहन और लुसियाने बुकानन ने भी चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं को बखूबी निभाया है। फिल्म का भावनात्मक पक्ष थोड़ा कमजोर जरूर लगता है, लेकिन डराने के मामले में यह कोई कसर नहीं छोड़ती।

 

Pls read:Bollywood: आलिया भट्ट और शरवरी वाघ की एक्शन थ्रिलर अल्फा ने बॉक्स ऑफिस पर की शानदार शुरुआत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *