देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से राज्य के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के मुख्य सेवक सदन में आयोजित ‘उत्तराखंड सीएसआर डायलॉग’ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कॉरपोरेट समूहों, केंद्रीय उपक्रमों और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ सीधा संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में किए गए दान और सेवा कार्यों का आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है, इसलिए औद्योगिक समूहों को राज्य के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के जीवन में सुधार लाने के लिए आगे आना चाहिए।
पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक संवाद नहीं, बल्कि राज्य के विकास के लिए एक साझा संकल्प है। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ हुए समझौतों (एमओयू) का उल्लेख करते हुए बताया कि कौशल विकास, सड़क सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, ग्राम विकास और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में निजी क्षेत्र का सहयोग मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने उन समूहों की सराहना की जो पहले से राज्य में बेहतर कार्य कर रहे हैं और अन्य समूहों से भी अपनी सीएसआर निधि का एक हिस्सा उत्तराखंड में ही खर्च करने की अपील की।
पहाड़ की चुनौतियां और समावेशी विकास
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक और पारिस्थितिक परिस्थितियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक पर्वतीय और सीमांत प्रदेश होने के नाते यहां विकास की चुनौतियां अन्य राज्यों से अलग हैं। राज्य सरकार के लिए “समग्र विकास” का अर्थ केवल भौतिक बुनियादी ढांचा खड़ा करना नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन के बीच संतुलन बनाना है। उन्होंने जोर दिया कि राज्य को ऐसा विकास चाहिए जो पहाड़ों की संवेदनशीलता का सम्मान करे और स्थानीय युवाओं को पलायन करने के बजाय राज्य के भीतर ही बेहतर अवसर उपलब्ध कराए। इस लक्ष्य की प्राप्ति में कॉरपोरेट जगत का अनुभव और आधुनिक प्रबंधन शैली महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
औद्योगिक प्रगति और सुशासन
राज्य की औद्योगिक नीतियों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 2023 के ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट’ के माध्यम से उत्तराखंड को 3.56 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले थे, जिनमें से एक लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों को धरातल पर उतारा जा चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम, लॉजिस्टिक नीति और स्टार्टअप नीति जैसी 30 से अधिक पारदर्शी नीतियां लागू की हैं। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य सूचकांक में उत्तराखंड देश में पहले स्थान पर है।
प्रशासनिक पारदर्शिता पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में पहली बार भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई गई है, जिसके तहत 200 से अधिक भ्रष्ट कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की गई है। इस पारदर्शी माहौल का सीधा लाभ उद्यमियों को मिल रहा है, क्योंकि अब उन्हें लाइसेंसिंग और भूमि आवंटन जैसी प्रक्रियाओं में किसी भी अनावश्यक बाधा का सामना नहीं करना पड़ता।
प्रमुख उपलब्धियां:
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नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य (SDG) इंडेक्स में उत्तराखंड देश भर में प्रथम स्थान पर रहा।
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‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में राज्य को ‘एचीवर्स’ और स्टार्टअप रैंकिंग में ‘लीडर्स’ की श्रेणी मिली है।
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औद्योगिक विकास के लिए राज्य में 200 करोड़ रुपये के वेंचर फंड की व्यवस्था की गई है।
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स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए इनक्यूबेशन सेंटर्स की स्थापना की गई है।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, खजान दास, विधायक उमेश शर्मा काऊ, विश्वास डाबर, आर.के सुधांशु, विनय शंकर पांडेय, सौरभ गहरवार और मनमोहन मैनाली सहित शासन के कई वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने अंत में विश्वास दिलाया कि उत्तराखंड देश के सबसे बेहतरीन “इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली” राज्य के रूप में उभर रहा है।