Cricket: इंग्लैंड में टीम इंडिया की शर्मनाक हार और श्रेयस अय्यर एवं गौतम गंभीर की फ्लॉप रणनीति

नई दिल्ली। टी20 वर्ल्ड कप 2026 की खिताबी जीत के बाद भारतीय क्रिकेट टीम को लगातार जीतने की आदत लग चुकी थी। क्रिकेट जगत में टीम इंडिया का दबदबा ऐसा था कि हार के बारे में कोई सोचता भी नहीं था। लेकिन विश्व कप के बाद जैसे ही टीम की कमान श्रेयस अय्यर के हाथों में सौंपी गई, जीत का वह सिलसिला मानो थम सा गया है। कप्तान श्रेयस अय्यर और मुख्य कोच गौतम गंभीर की जोड़ी के मार्गदर्शन में भारतीय टीम जीतना जैसे भूल ही गई है। टीम प्रबंधन द्वारा की जा रही लगातार गलतियां और उसके बाद दिए जाने वाले नए बहाने प्रशंसकों और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा रहे हैं।

इंग्लैंड के खिलाफ ब्रिस्टल में खेले गए चौथे टी20 मुकाबले में भारत को बेहद शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। इस मैच में भारत ने इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 159 रनों का लक्ष्य रखा था, जिसे मेजबान टीम ने महज एक विकेट खोकर 37 गेंद शेष रहते ही आसानी से हासिल कर लिया। इस करारी शिकस्त के साथ ही भारतीय टीम के हाथ से सीरीज भी निकल गई है। अब स्थिति यह आ गई है कि भारतीय टीम के लिए अपनी साख बचाना भी मुश्किल लग रहा है।

पुरानी गलतियों से नहीं लिया सबक
भारतीय टीम इस पूरे दौरे पर उसी आक्रामक शैली में खेलने की कोशिश कर रही है जैसे वह घरेलू मैदानों पर आईपीएल के दौरान खेलती है। बिना पिच की स्थिति और मैदान की परिस्थितियों को समझे लगातार बड़े शॉट खेलने की रणनीति टीम पर भारी पड़ रही है। यही हाल आयरलैंड के खिलाफ सीरीज में भी देखा गया था, जहां भारत को मुंह की खानी पड़ी थी। इंग्लैंड में भी पांच मैचों की सीरीज के दौरान टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। पूरी बल्लेबाजी यूनिट एक ही पैटर्न पर फेल हो रही है। सलामी बल्लेबाज अच्छी शुरुआत देने में नाकाम हैं, मिडिल ऑर्डर दबाव में बिखर रहा है और फिनिशर की भूमिका निभाने वाला कोई भी खिलाड़ी क्रीज पर टिकने का साहस नहीं दिखा पा रहा है।

गेंदबाजी के मोर्चे पर भी हालात चिंताजनक हैं। भारतीय गेंदबाज शुरुआत में विकेट चटकाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अगर एकाध विकेट मिल भी जाता है, तो गेंदबाज अपनी लय बरकरार नहीं रख पा रहे और मिडिल एवं डेथ ओवरों में जमकर रन लुटा रहे हैं। श्रेयस अय्यर और गौतम गंभीर की अगुवाई में इन खामियों को दूर करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाते नहीं दिख रहे हैं।

युवा खिलाड़ियों को कोचिंग की जरूरत
टीम के युवा बल्लेबाज अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी अपनी आक्रामक शैली के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उन्हें परिस्थितियों के अनुसार खेलना सिखाने की सख्त जरूरत है। खासकर तब, जब विपक्षी टीम आपकी कमजोरी को भांप चुकी हो। जोफ्रा आर्चर ने वैभव सूर्यवंशी को शॉर्ट पिच गेंद पर आउट कर भारत की कमजोरी को उजागर किया। अभिषेक शर्मा और ईशान किशन के खिलाफ भी इंग्लैंड की शॉर्ट बॉल रणनीति पूरी तरह कारगर रही।

इंग्लैंड के बड़े मैदानों पर बाउंड्री को पार करना आसान नहीं होता, जबकि भारतीय खिलाड़ी छोटे मैदानों और सपाट पिचों की आदत के कारण पुल शॉट खेलने के चक्कर में डीप मिडविकेट पर कैच दे रहे हैं। यदि खिलाड़ी शॉर्ट गेंदों से बच भी जाते हैं, तो वे इंग्लैंड की सीम और स्विंग गेंदबाजी के सामने बेबस नजर आते हैं। यह स्पष्ट है कि कप्तान अय्यर और कोच गंभीर की ओर से खिलाड़ियों को इन तकनीकी समस्याओं से उबारने के लिए पर्याप्त सहयोग नहीं मिल रहा है।

चयन प्रक्रिया और गेंदबाजी पर सवाल
इंग्लैंड की परिस्थितियों में जहां तेज गेंदबाज गेम चेंजर साबित होते हैं, वहीं भारतीय टीम मैनेजमेंट स्पिनरों पर ज्यादा भरोसा दिखा रहा है। टीम चयन में यह स्पष्ट कमी दिख रही है कि कप्तान और कोच यहां की पिचों को भारत जैसा समझ रहे हैं। तेज गेंदबाजों के बजाए स्पिनरों की अधिकता टीम के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। साथ ही भारतीय गेंदबाजों को यह समझ नहीं आ रहा कि उन्हें किस लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी करनी है।

 

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