मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में बुधवार की सुबह हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। जिले के कई हिस्सों में भारी वर्षा के कारण सामान्य जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है। लैंडस्लाइड और पहाड़ों से मलबा गिरने की घटनाओं ने यातायात व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। विशेष रूप से पठानकोट-मंडी नेशनल हाईवे पर यातायात बाधित होने से यात्रियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंडी शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर मैगल के पास पहाड़ी दरकने से पुराना हाईवे मलबे की चपेट में आ गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने इस मार्ग पर बड़ी गाड़ियों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी है। हालांकि, छोटी गाड़ियों को नए फोरलेन मार्ग से डाइवर्ट कर भेजा जा रहा है। राहत की बात यह है कि मलबे का एक बड़ा हिस्सा नए फोरलेन तक जरूर पहुंचा है, लेकिन सड़क के इस हिस्से को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। पुराने नेशनल हाईवे पर भारी कीचड़ और पत्थरों के कारण यातायात सुचारू करने में समय लग सकता है।
चलती बस पर गिरा पत्थर, यात्री घायल
बारिश के दौरान एक खौफनाक हादसा उस समय टल गया जब हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की एक बस पहाड़ी से गिरते पत्थरों की चपेट में आ गई। यह बस पराशर से मंडी की ओर आ रही थी। रास्ते में अचानक पहाड़ी से एक बड़ा पत्थर गिरा और बस का शीशा तोड़ते हुए सीधे अंदर जा घुसा। इस घटना में बस की सीट पर बैठी एक सवारी पत्थर की चोट और शीशे के टुकड़े लगने से घायल हो गई। घायल व्यक्ति को तुरंत उपचार के लिए ले जाया गया है। इस हादसे ने पहाड़ी रास्तों पर सफर करने वाले वाहन चालकों और यात्रियों के बीच दहशत पैदा कर दी है।
सड़कें बंद और बस रूट ठप
बारिश का असर केवल मुख्य राजमार्गों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी सड़कों की हालत खराब है। मंडी जिले के टिक्कर क्षेत्र में पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा आने के कारण बस सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं। सड़कें बंद होने के कारण परिवहन निगम की बसें अपने निर्धारित गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रही हैं। इसके अलावा, मलौरी टनल और मंडी बाईपास के पास भी लगातार पत्थर गिरने की खबरें सामने आई हैं। इन संवेदनशील स्थानों पर वाहन चलाना खतरनाक बना हुआ है, जिससे वाहन चालकों को काफी सावधानी बरतनी पड़ रही है।
खतरे के निशान के पास ब्यास नदी
नदी-नालों के जलस्तर में भी तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुल्लू में बादल फटने की घटना के बाद पंडोह बांध के जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए उसके गेट खोल दिए गए हैं। बांध से पानी छोड़े जाने के कारण ब्यास नदी उफान पर है। वर्तमान में ब्यास नदी का जलस्तर खतरे के निशान से महज एक फीट नीचे रह गया है। प्रशासन ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग ने आने वाले समय में भी क्षेत्र में बारिश की संभावना जताई है, जिससे स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बहुत जरूरी होने पर ही यात्रा करें और भूस्खलन वाले क्षेत्रों के पास रुकने से बचें। लोक निर्माण विभाग और एनएचएआई की टीमें सड़कों से मलबा हटाने के कार्य में जुटी हुई हैं ताकि जल्द से जल्द यातायात बहाल किया जा सके। फिलहाल, मंडी जिले में बारिश का कहर जारी है और प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है।
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