Uttarakhand: उत्तराखंड की नीति निर्धारण प्रक्रिया में फ्लोटिंग पॉपुलेशन को शामिल करने पर मुख्यमंत्री का जोर

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नीति आयोग की टीम के साथ राज्य के भविष्य की रूपरेखा और विकास योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री आवास में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक का नेतृत्व नीति आयोग के सदस्य एम. श्रीनिवास ने किया। इस दौरान उत्तराखंड के समग्र और सतत विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर मंथन हुआ। मुख्यमंत्री ने राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और बढ़ती जरूरतों के अनुरूप ठोस एवं दूरदर्शी नीतियां बनाने पर विशेष बल दिया।

पुष्कर सिंह धामी ने बैठक में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु की ओर आयोग का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड एक तीर्थाटन और पर्यटन प्रधान राज्य है। यहाँ की स्थायी आबादी की तुलना में हर साल सात से आठ गुना अधिक लोग (फ्लोटिंग पॉपुलेशन) बाहरी राज्यों और देशों से यहाँ पहुँचते हैं। इस अतिरिक्त जनसंख्या के कारण राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता अभियान, परिवहन और अन्य मूलभूत ढांचों पर भारी दबाव पड़ता है। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि संसाधनों के आवंटन और भविष्य की योजनाओं के निर्माण के समय इस तथ्य को प्राथमिकता के साथ शामिल किया जाना चाहिए।

स्वास्थ्य और पोषण पर विशेष फोकस
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल आधुनिक उपकरणों और अस्पतालों का निर्माण ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने स्वास्थ्य शिक्षा और जनजागरूकता को समान महत्व देने की बात कही ताकि आम नागरिक इन सुविधाओं का प्रभावी लाभ उठा सकें। इसके साथ ही, महिला सशक्तिकरण और बाल विकास के क्षेत्र में उन्होंने एनीमिया और कुपोषण जैसी गंभीर समस्याओं को जड़ से खत्म करने की आवश्यकता जताई। धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों को कुपोषण मुक्त करने के लिए एक समन्वित कार्ययोजना बनाई जाए और उसे धरातल पर कड़ाई से लागू किया जाए।

नवाचार और कौशल विकास की दिशा
बैठक में राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाले क्षेत्रों जैसे कृषि, बागवानी, जैव विविधता और पर्यटन पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने नीति आयोग से अनुरोध किया कि इन क्षेत्रों में नई तकनीकों और नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए विषय विशेषज्ञों के साथ मिलकर नियमित सेमिनार और संवाद आयोजित किए जाएं। इससे राज्य की स्थानीय आवश्यकताओं के हिसाब से व्यावहारिक नीतियां तैयार करने में मदद मिलेगी।

जल संरक्षण और रोजगार सृजन
बढ़ते पर्यावरण संकट और पानी की कमी को देखते हुए मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। उन्होंने ‘रेन वाटर हार्वेस्टिंग’ (वर्षा जल संचयन) के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी योजनाएं लागू करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि नीति आयोग और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय से उत्तराखंड के संतुलित विकास को नई गति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, अपर सचिव नरेंद्र भण्डारी, संदीप तिवारी, सेतु के एसीईओ मनोज पंत सहित नीति आयोग की सलाहकार सोनिया पंत, उप सचिव दीपक कुमार और विशेष कार्याधिकारी शोभित कुमार उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि नीति आयोग का मार्गदर्शन उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने में सहायक सिद्ध होगा।

 

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