शिमला। हिमाचल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक और वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने के लिए राज्य सरकार ने बड़े बदलावों की तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती महत्ता को देखते हुए अब एक समर्पित एआई विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही, स्कूलों की निगरानी और निरीक्षण व्यवस्था को पारदर्शी व प्रभावी बनाने के लिए हिमाचल प्रदेश अब ‘जम्मू-कश्मीर मॉडल’ को अपनाने जा रहा है।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने राज्य सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान उच्चतर शिक्षा विभाग को इस दिशा में संभावनाएं तलाशने और एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के कड़े निर्देश दिए हैं। बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि देश के कई अन्य राज्यों में पहले ही एआई संस्थानों की स्थापना हो चुकी है, ऐसे में हिमाचल के युवाओं को भविष्य की तकनीक के लिए तैयार करना अनिवार्य है।
निरीक्षण के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा
बैठक के दौरान रोहित ठाकुर ने विभाग को निर्देश दिए कि स्कूलों के निरीक्षण के लिए अब व्हाट्सएप और गूगल मीट जैसे डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जाए। जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर शुरू होने वाली इस ऑनलाइन निरीक्षण व्यवस्था से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि सुदूर क्षेत्रों के स्कूलों की गतिविधियों पर भी मुख्यालय से सीधी नजर रखी जा सकेगी। इसके अतिरिक्त, शिक्षा मंत्री ने प्रवासियों के उन बच्चों की पहचान करने को कहा है जो वर्तमान में स्कूल नहीं जा रहे हैं, ताकि उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जा सके।
शिक्षक भर्ती और आधारभूत संरचना पर जोर
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई गई है। वर्तमान में सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के लिए कुल 3,468 पदों पर भर्ती की कार्यवाही चल रही है। शिक्षा मंत्री के अनुसार, 2,668 नियमित पदों का अधियाचन राज्य चयन आयोग हमीरपुर को भेजा जा चुका है। हाल ही में 292 अंग्रेजी और 284 गणित के शिक्षकों ने विभिन्न विद्यालयों में अपनी सेवाएं देना शुरू कर दिया है।
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