लखीसराय। लखीसराय में रविवार को नीट यूजी परीक्षा के दौरान उजागर हुए साल्वर गैंग के मामले में पुलिस की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने परीक्षा की पूरी सुरक्षा व्यवस्था को धता बताने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली में ही बड़ी सेंधमारी कर दी थी। गिरोह ने परीक्षा केंद्रों पर तैनात बायोमेट्रिक जांच कर्मियों के साथ सांठगांठ की और इसी मिलीभगत के सहारे वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह फर्जी परीक्षार्थियों (साल्वरों) को केंद्र के भीतर प्रवेश दिलाने में सफल रहे। यह मामला उजागर होने के बाद परीक्षा की शुचिता पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक पावापुरी मेडिकल कॉलेज, राजगीर का छात्र रविशंकर बताया जा रहा है। रविशंकर ने ही विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे मेधावी छात्रों का एक संगठित नेटवर्क तैयार किया था, जिन्हें ‘साल्वर’ के रूप में मोटी रकम के बदले परीक्षा में बैठाया जाना था। रविशंकर की योजना उन अभ्यर्थियों को निशाना बनाने की थी जो मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थे। इस साजिश को अमलीजामा पहनाने के लिए गिरोह ने बायोमेट्रिक स्टाफ के रूप में अपने प्यादों को तैनात किया था।
जांच में यह भी सामने आया है कि पटना मेडिकल कॉलेज के चौथे वर्ष के छात्र मयंक कश्यप ने अंकित कुमार की पहचान चुराकर बायोमेट्रिक स्टाफ के रूप में ड्यूटी की थी। आरोप है कि मयंक कश्यप ने ही बायोमेट्रिक मशीन और डेटा के साथ छेड़छाड़ की, जिससे फर्जी परीक्षार्थियों को केंद्र के भीतर घुसने में कोई तकनीकी दिक्कत नहीं हुई। इसी रास्ते का इस्तेमाल कर साल्वर अंदर पहुंचे और वास्तविक छात्रों की जगह बैठकर परीक्षा दी।
पुलिस अब तक इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 30 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। पकड़े गए लोगों में नौ साल्वर शामिल हैं, जो प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों के छात्र बताए जा रहे हैं। इनके अलावा बायोमेट्रिक एजेंसी के कर्मचारी, गिरोह के अन्य सदस्य और एक मूल परीक्षार्थी को भी सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। पुलिस फिलहाल कई अन्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ आगे बढ़ने के साथ ही इस रैकेट के आर्थिक लेन-देन और नए सहयोगियों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
लखीसराय के एसडीपीओ शिवम कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि गिरोह प्रत्येक अभ्यर्थी से 10 से 12 लाख रुपये में सौदा तय करता था। सौदे की शर्तों के मुताबिक, एक से दो लाख रुपये बतौर अग्रिम राशि (एडवांस) लिए जाते थे, जबकि शेष बड़ी राशि का भुगतान परीक्षा में सफलता और मेडिकल कॉलेज में नामांकन होने के बाद सुनिश्चित किया गया था। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल कॉल डिटेल्स और डिजिटल लेन-देन के रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि इस पूरे सिंडिकेट की जड़ों तक पहुँचा जा सके।
इस मामले में केंद्रीय विद्यालय लखीसराय के प्रभारी प्राचार्य एवं सिटी कोऑर्डिनेटर दिनेश कुमार भगत के आवेदन पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एसडीपीओ ने स्पष्ट किया है कि जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और इस साजिश में शामिल किसी भी छोटे या बड़े अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। बायोमेट्रिक जैसी उच्च तकनीक वाली सुरक्षा व्यवस्था में सेंधमारी ने प्रशासन को भी अलर्ट मोड पर ला दिया है। लखीसराय पुलिस अब इस गिरोह के अंतरराज्यीय संपर्कों की भी तलाश कर रही है।
Pls read:Bihar: पटना फायरिंग मामले में खान सर के दो सुरक्षाकर्मी गिरफ्तार, अब जांच के घेरे में आए फैजल खान