Himachal: हिमाचल प्रदेश में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए ई-टैक्सी पर मिलेगी पचास प्रतिशत सब्सिडी

शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को श्रम एवं रोजगार विभाग की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक के दौरान उन्होंने विभाग द्वारा संचालित की जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति का विस्तृत जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि इन सभी योजनाओं का लाभ समाज के पात्र लाभार्थियों तक निर्धारित समय सीमा के भीतर पहुंचना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली में आधुनिकता लाने पर जोर देते हुए कहा कि लाइसेंस और प्रमाण पत्र प्रदान करने की पूरी प्रक्रिया को पूर्णतः डिजिटल बनाया जाए ताकि आम जनता को सरकारी सेवाओं का लाभ लेने में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

राज्य में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में मुख्यमंत्री ने राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना-2023 के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत युवाओं को ई-टैक्सी खरीदने के लिए सरकार की ओर से 50 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है। सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके तहत 500 और युवाओं को ई-टैक्सी की खरीद पर 50 प्रतिशत सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी। इस विशेष प्रयोजन के लिए बजट में 50 करोड़ रुपये का प्रावधान भी कर दिया गया है। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि इसी वित्तीय वर्ष में 500 अन्य युवाओं को ई-रिक्शा खरीदने के लिए ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (डीबीटी) के माध्यम से 50 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी प्रदान की जाएगी।

हिमाचल प्रदेश में व्यापारिक गतिविधियों को सुगम बनाने और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की दिशा में भी बड़े सुधार किए हैं। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जानकारी दी कि प्रदेश सरकार ने ‘हिमाचल प्रदेश दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम, 1969’ और इसके नियमों में आवश्यक संशोधन किए हैं। इन नए प्रावधानों के लागू होने से अब राज्य में दुकानों और व्यावसायिक संस्थानों को दिन-रात यानी 24 घंटे संचालित करने की अनुमति दे दी गई है। मुख्यमंत्री का मानना है कि इस कदम से न केवल व्यापारियों को अपना काम फैलाने में लचीलापन मिलेगा, बल्कि उपभोक्ता भी अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय खरीदारी कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने बैठक में स्पष्ट किया कि उनकी सरकार अनुपालन प्रणाली को अधिक प्रभावी और सरल बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। सरकार का उद्देश्य एक ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां व्यवसाय करना आसान हो और साथ ही श्रमिकों के हितों और कल्याण की रक्षा भी पूरी मजबूती के साथ की जा सके। उन्होंने कहा कि नियमों में किए गए सुधारों से राज्य के आर्थिक ढांचे को मजबूती मिलेगी और औद्योगिक विकास की गति तेज होगी।

इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, मुख्य सचिव के.के. पंत, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, सचिव प्रियंका बसु इंग्ति और श्रम आयुक्त वीरेंद्र शर्मा सहित विभाग के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे इन विकासपरक योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की कोताही न बरतें और धरातल पर इनके परिणामों की नियमित निगरानी करें।

 

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