चंडीगढ़। पंजाब में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस ने अभी से अपनी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में पंजाब कांग्रेस की शीर्ष लीडरशिप के साथ पार्टी आलाकमान के मंथन का दौर लगातार जारी है। पार्टी की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले महज 12 दिनों के भीतर प्रदेश नेतृत्व को चौथी बार दिल्ली तलब किया गया है। यह स्पष्ट संकेत है कि कांग्रेस आगामी चुनावों के लिए रणनीतिक स्तर पर अभी से कोई बड़ी योजना तैयार करने में जुट गई है।
ताजा घटनाक्रम के तहत बुधवार दोपहर बाद पंजाब के वरिष्ठ नेताओं को एक बार फिर राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने का संदेश प्राप्त हुआ, जिसके तुरंत बाद कई दिग्गज नेता दिल्ली के लिए रवाना हो गए। वीरवार को होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंद्र सिंह राजा वड़िंग, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी जैसे प्रमुख चेहरे शामिल होंगे। इनके अलावा परगट सिंह, राणा गुरजीत सिंह, सांसद सुखजिंद्र सिंह रंधावा, सांसद डॉ. अमर सिंह, विजय इंदर सिंगला और अरुणा चौधरी सहित कई अन्य वरिष्ठ नेताओं के भी इस बैठक में मौजूद रहने की संभावना है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस बैठक का मुख्य एजेंडा पंजाब की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों का सूक्ष्म विश्लेषण करना और संगठनात्मक ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। आलाकमान धरातल पर पार्टी की पकड़ मजबूत करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। इसके अलावा, बैठक में कुछ महत्वपूर्ण संगठनात्मक बदलावों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल ने इस संबंध में संकेत दिया है कि बैठक के दौरान राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों की राजनीतिक स्थिति का गहराई से आकलन किया जाएगा।
कांग्रेस की इस रणनीति का एक बड़ा हिस्सा संभावित उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को समय से पहले शुरू करना भी है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यदि उम्मीदवारों के नामों पर प्रारंभिक स्तर पर विचार कर लिया जाए, तो उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में जनता के बीच जाने और जनसंपर्क अभियान चलाने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कांग्रेस किसी भी आकस्मिक स्थिति के लिए तैयार रहना चाहती है। यदि राज्य में किसी भी कारणवश निर्धारित समय से पहले चुनाव की स्थिति बनती है, तो पार्टी पूरी तरह से चुनावी मोड में नजर आएगी।
आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी का मुख्य लक्ष्य संभावित चेहरों को सक्रिय करना और जमीनी स्तर पर संगठन का विस्तार करना है। दिल्ली में लगातार हो रही इन उच्च स्तरीय बैठकों को राजनीतिक विशेषज्ञ इस रूप में देख रहे हैं कि कांग्रेस आलाकमान पंजाब में सत्ता में वापसी के लिए दीर्घकालिक चुनावी रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है। पार्टी अब गुटबाजी से ऊपर उठकर एक एकजुट चेहरे के साथ जनता के बीच जाने की तैयारी में है, ताकि आगामी चुनाव में अपनी स्थिति को पहले से कहीं अधिक मजबूत किया जा सके। आगामी कुछ दिनों में इस मंथन के ठोस परिणाम सांगठनिक फेरबदल के रूप में भी देखने को मिल सकते हैं।