WB: ममता बनर्जी को बड़ा झटका और बागी ऋतब्रत बनर्जी बने बंगाल के नेता प्रतिपक्ष

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बुधवार को एक बड़ा और अप्रत्याशित उलटफेर देखने को मिला, जिसने तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी के राजनीतिक आधार को हिलाकर रख दिया है। विधानसभा अध्यक्ष ने बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को आधिकारिक तौर पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नियुक्त कर दिया है। इस नियुक्ति के साथ ही ऋतब्रत बनर्जी ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उन्हें तृणमूल कांग्रेस के करीब 60 विधायकों का ठोस समर्थन प्राप्त है। यह घटनाक्रम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी के भीतर एक बड़ी बगावत और विभाजन की पुष्टि करता है।

तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित किए गए नेता संदीपन साहा ने इस पूरे मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्होंने विधानसभा सचिवालय को आवश्यक पत्र सौंप दिया है। उन्होंने जानकारी दी कि नेता प्रतिपक्ष (LoP) के लिए निर्धारित आधिकारिक कमरा अब ऋतब्रत बनर्जी को आवंटित किया जा चुका है और वे वहां अपना पदभार संभाल चुके हैं। संदीपन साहा के अनुसार, यह कदम राज्य की लोकतांत्रिक व्यवस्था और सदन के भीतर विधायकों की सामूहिक इच्छा का सम्मान करने के लिए उठाया गया है।

पार्टी के भीतर मची इस उथल-पुथल के बीच संदीपन साहा ने ममता बनर्जी के प्रति सम्मान दिखाते हुए एक विशेष प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने कहा कि उनकी और अन्य विधायकों की यह प्रबल इच्छा है कि ममता बनर्जी उनकी सलाहकार की भूमिका में बनी रहें। वे चाहते हैं कि ममता बनर्जी समय-समय पर अपनी सलाह और मार्गदर्शन देती रहें ताकि नेता प्रतिपक्ष और मुख्य सचेतक के नेतृत्व में विधानसभा के भीतर पार्टी की गतिविधियों को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सके।

हालांकि, संदीपन साहा ने पार्टी की वर्तमान दुर्दशा के लिए सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज पार्टी जिस संकटपूर्ण स्थिति में खड़ी है, उसके पीछे मुख्य कारण अभिषेक बनर्जी की संगठनात्मक विफलता है। साहा ने तर्क दिया कि जब पार्टी को सफलता मिलती है तो उसका पूरा श्रेय अभिषेक बनर्जी लेते हैं, ऐसे में जब चीजें गलत हो रही हैं और पार्टी बिखर रही है, तो उन्हें इसकी पूरी जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम पर बागी गुट के एक अन्य प्रमुख नेता प्रसून बनर्जी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर इस नेतृत्व परिवर्तन का अर्थ यह कतई नहीं है कि वे अपनी विचारधारा से समझौता कर रहे हैं। प्रसून बनर्जी ने जोर देकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध उनका राजनीतिक और वैचारिक संघर्ष पहले की तरह ही बिना रुके जारी रहेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सदन में एक जिम्मेदार विपक्ष के रूप में कार्य करते हुए वे आवश्यकता पड़ने पर सरकार के साथ रचनात्मक सहयोग भी करेंगे।

प्रसून बनर्जी के अनुसार, यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि अधिकांश विधायकों ने सामूहिक रूप से विचार-विमर्श करने के बाद चार नेताओं का चयन किया है जो अब विधानसभा में उनका नेतृत्व करेंगे। उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह जरूरी है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों सदन की कार्यवाही में सक्रिय रूप से भाग लें और सार्थक बहस करें। इसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए विधानसभा के अधिकांश विधायकों ने एकजुट होकर यह निर्णय लिया है। ममता बनर्जी के लिए यह स्थिति न केवल एक प्रशासनिक चुनौती है बल्कि उनके राजनीतिक भविष्य के लिए भी एक बड़ा संकट मानी जा रही है।

 

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