Himachal: आदर्श आचार संहिता उल्लंघन मामले में मुख्य सचिव की चुप्पी पर निर्वाचन आयोग सख्त – The Hill News

Himachal: आदर्श आचार संहिता उल्लंघन मामले में मुख्य सचिव की चुप्पी पर निर्वाचन आयोग सख्त

शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनावों के बीच आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का मामला गहराता जा रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए नोटिस का मुख्य सचिव संजय गुप्ता की ओर से पांच दिनों के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया गया है। मुख्य सचिव की इस खामोशी पर कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने बुधवार को एक रिमाइंडर भेजा है। इस रिमाइंडर के माध्यम से आयोग ने जवाब में हो रही देरी का कारण पूछा है और स्पष्ट किया है कि मुख्य सचिव का उत्तर मिलने के बाद ही इस मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

यह पूरा विवाद 22 मई को राज्य सरकार द्वारा आयोजित कैबिनेट की बैठक से शुरू हुआ था। वर्तमान में प्रदेश के कुछ हिस्सों में स्थानीय निकायों के चुनाव होने के कारण आदर्श चुनाव आचार संहिता प्रभावी है। नियमों के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया के दौरान सरकार को कोई भी ऐसा नीतिगत निर्णय लेने या बैठक करने की मनाही होती है, जो मतदाताओं को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सके। कैबिनेट की इस बैठक के आयोजन के तुरंत बाद विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसकी शिकायत राज्य निर्वाचन आयोग से की थी। भाजपा का तर्क है कि सरकार ने जानबूझकर चुनावी माहौल के बीच बैठक बुलाई ताकि मतदाताओं को प्रलोभन दिया जा सके।

भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस गंभीर विषय पर न केवल निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाया, बल्कि राज्यपाल से मिलकर उन्हें भी ज्ञापन सौंपा। भाजपा का आरोप है कि मंत्रिमंडल की इस बैठक में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनावों को ध्यान में रखकर कई लोकलुभावन निर्णय लिए गए हैं। पार्टी का कहना है कि प्रदेश में आचार संहिता लागू होने के बावजूद सरकार द्वारा लिए गए ये फैसले सीधे तौर पर चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं।

इन शिकायतों के आधार पर निर्वाचन आयोग ने 23 मई को मुख्य सचिव संजय गुप्ता को नोटिस जारी किया था। आयोग ने मुख्य सचिव से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा था। आयोग ने मुख्य रूप से यह पूछा था कि यदि कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई थी, तो उसमें कुल कितने और क्या-क्या निर्णय लिए गए हैं। इसके साथ ही, आयोग ने यह भी जानकारी मांगी है कि क्या इन फैसलों में कुछ ऐसे बिंदु शामिल हैं जिनका चुनाव प्रक्रिया या मतदाताओं के रुख पर कोई प्रभाव पड़ सकता है। एक अन्य महत्वपूर्ण सवाल यह भी था कि कैबिनेट की गोपनीय चर्चाओं और निर्णयों की जानकारी मीडिया तक किसने और कैसे पहुंचाई।

राज्य निर्वाचन आयोग अब इस मामले में मुख्य सचिव की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। आयोग का मानना है कि आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। यदि मुख्य सचिव की रिपोर्ट में यह पाया जाता है कि कैबिनेट के फैसलों से चुनाव प्रभावित हुए हैं, तो सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। फिलहाल, रिमाइंडर भेजे जाने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। भाजपा ने इसे सरकार की सोची-समझी रणनीति बताया है और मांग की है कि ऐसे निर्णयों पर तुरंत रोक लगाई जाए जो चुनावी लाभ के लिए लिए गए हैं। अब सबकी नजरें मुख्य सचिव द्वारा दिए जाने वाले संभावित जवाब पर टिकी हैं, जिसके आधार पर अनिल खाची भविष्य की कार्रवाई का खाका तैयार करेंगे।

 

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