चंडीगढ़। पंजाब में आगामी निर्वाचन प्रक्रियाओं को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने की दिशा में राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी कमर कस ली है। प्रदेश में मतदाता सूचियों के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) अभियान की शुरुआत होने वाली है, लेकिन इससे पूर्व की तैयारियों ने अब गति पकड़ ली है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि पंजाब सरकार और निर्वाचन विभाग ने एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही 90 प्रतिशत ‘प्री-मैपिंग’ का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, पंजाब में प्री-एसआईआर मैपिंग का कार्य संतोषजनक ढंग से आगे बढ़ रहा है और अब तक राज्य के 84 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं की सफलतापूर्वक मैपिंग पूरी कर ली गई है। निर्वाचन विभाग के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है क्योंकि मैपिंग के माध्यम से ही यह सुनिश्चित किया जाता है कि मतदाता सूची में दर्ज विवरण सही और अद्यतन हैं। अनिंदिता मित्रा ने स्पष्ट किया कि इस मैपिंग प्रक्रिया को वैज्ञानिक और तुलनात्मक आधार पर संपन्न किया जा रहा है। वर्तमान मतदाता सूचियों के मिलान और शुद्धिकरण के लिए पंजाब में वर्ष 2003 में आयोजित किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के डेटा को आधार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। पुरानी सूचियों से वर्तमान डेटा का मिलान करने से मतदाता सूचियों में आने वाली विसंगतियों को दूर करने में बड़ी मदद मिल रही है।
प्रशासनिक स्तर पर इस कार्य को सुचारू बनाने के लिए बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने उन मतदाताओं के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं जिनका नाम किसी कारणवश प्री-मैपिंग प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सका है। अनिंदिता मित्रा ने जानकारी दी कि यदि कोई मतदाता प्री-मैप्ड नहीं है, तो उसे अपनी नागरिक जिम्मेदारी निभाते हुए बीएलओ द्वारा प्रदान किया जाने वाला ‘इन्यूमिरेशन फॉर्म’ (ईएफ) भरना होगा। यह फॉर्म भरने के बाद इसे वापस संबंधित बीएलओ के पास ही जमा कराना होगा। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही संबंधित मतदाता का नाम आधिकारिक रूप से ‘ड्राफ्ट रोल’ यानी मतदाता सूची के प्रारंभिक मसौदे में शामिल किया जा सकेगा।
अनिंदिता मित्रा ने पंजाब के तमाम नागरिकों और मतदाताओं से इस प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की मार्मिक अपील की है। उन्होंने कहा कि एक सशक्त लोकतंत्र की नींव एक पारदर्शी और सटीक मतदाता सूची पर टिकी होती है। उन्होंने मतदाताओं से अनुरोध किया कि जब भी बीएलओ उनके घर पहुंचें, तो वे उन्हें पूर्ण सहयोग प्रदान करें और सही जानकारी साझा करें। घर-घर जाकर डेटा एकत्र करने का यह कार्य निर्वाचन आयोग की उस प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसके तहत यह सुनिश्चित किया जाता है कि राज्य का कोई भी पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित न रहे।
निर्वाचन विभाग को विश्वास है कि वर्तमान में प्राप्त 84 प्रतिशत की सफलता दर जल्द ही 90 प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य तक पहुंच जाएगी। प्री-मैपिंग का यह कार्य पूरा होते ही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का औपचारिक अभियान शुरू कर दिया जाएगा। विभाग का पूरा ध्यान इस समय उन क्षेत्रों पर है जहां मैपिंग की दर थोड़ी धीमी है। आने वाले दिनों में बीएलओ के कार्यों की सघन निगरानी की जाएगी ताकि एसआईआर प्रक्रिया के शुरू होने तक पंजाब की मतदाता सूची पूरी तरह से तैयार और विश्वसनीय हो सके। इस अभियान की सफलता के लिए प्रशासनिक मुस्तैदी के साथ-साथ जनभागीदारी को भी अनिवार्य माना जा रहा है।