हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले स्थित डॉक्टर राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज में एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही और फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां एक महिला कर्मचारी ने विभाग में कार्यभार तो संभाला, लेकिन उसके बाद वह एक दिन भी काम पर नहीं आई। इसके बावजूद हाजिरी रजिस्टर में उसकी उपस्थिति दर्ज होती रही। इस पूरे मामले ने अस्पताल प्रबंधन की आंतरिक कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना उजागर होने के बाद अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है और आंतरिक जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
ज्वाइनिंग के बाद से लापता कर्मचारी
यह पूरा मामला पैथोलॉजी विभाग की एक लैब तकनीशियन से जुड़ा है। रिकॉर्ड के अनुसार, इस महिला कर्मचारी ने 6 अप्रैल को मेडिकल कॉलेज में अपनी ज्वाइनिंग दी थी। नियमानुसार ज्वाइनिंग के अगले दिन से उसे नियमित ड्यूटी पर उपस्थित होना चाहिए था, लेकिन वह कार्यस्थल पर नहीं पहुंची। हैरानी की बात यह है कि शारीरिक रूप से अनुपस्थित होने के बावजूद रजिस्टर में उसकी हाजिरी 21 अप्रैल तक लगातार लगती रही। पखवाड़े भर तक चली इस धांधली ने सबको चौंका दिया है कि आखिर एक कर्मचारी की गैरमौजूदगी प्रशासन की नजरों से कैसे ओझल रही।
आंतरिक मिलीभगत की आशंका
मेडिकल कॉलेज जैसे संवेदनशील संस्थान में जहां हर कर्मचारी की जवाबदेही तय होती है, वहां इस तरह की घटना बिना किसी आंतरिक मिलीभगत के संभव नहीं दिखती। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब महिला कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद ही नहीं थी, तो उसकी जगह हाजिरी कौन भर रहा था और किसके आदेश पर यह सब हो रहा था? क्या विभाग का ही कोई अन्य कर्मचारी इस फर्जीवाड़े में शामिल है? इस प्रकरण ने कॉलेज प्रशासन की साख पर बट्टा लगाया है और यह संकेत दिया है कि उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया में भारी चूक हो रही है, जिसका लाभ उठाकर कर्मचारी घर बैठे वेतन पकाने की जुगत में रहते हैं।
विभाग प्रमुख की सतर्कता से खुलासा
इस गड़बड़झाले का पर्दाफाश तब हुआ जब प्रयोगशाला विभाग के प्रमुख को इस अनियमितता की भनक लगी। उन्होंने जब रिकॉर्ड और वास्तविक उपस्थिति का मिलान किया, तो मामला पूरी तरह उजागर हो गया। पैथोलॉजी विभाग की एचओडी कविता ने इस विषय की गंभीरता को देखते हुए तुरंत उच्च अधिकारियों को सूचित किया। उन्होंने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आते ही इसकी रिपोर्ट तैयार कर दी गई है और पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि अनुशासनहीनता के ऐसे मामलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासन का पक्ष और आगामी कार्रवाई
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक देशराज शर्मा ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि पैथोलॉजी विभाग की एचओडी से इस पूरे प्रकरण पर विस्तृत लिखित रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद मामले की गहन जांच की जाएगी कि हाजिरी रजिस्टर में छेड़छाड़ के लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही या जानबूझकर की गई धोखाधड़ी पाई जाती है, तो संबंधित दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, कॉलेज के प्रधानाचार्य से इस बारे में बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल पाया है। इस मामले ने सरकारी संस्थानों में डिजिटल उपस्थिति प्रणाली की आवश्यकता को भी फिर से रेखांकित किया है।