नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर पहुंच गया है, जहां अमेरिकी सेना ने
ईरान की छह छोटी नावों को नष्ट करने का दावा किया है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के
अनुसार, उन्होंने ईरानी क्रूज मिसाइलों और ड्रोनों के हमलों को भी सफलतापूर्वक
विफल कर दिया है। यह सैन्य कार्रवाई तब हुई जब तेहरान इस रणनीतिक जलमार्ग के
माध्यम से वाणिज्यिक शिपिंग शुरू करने के अमेरिकी नौसैनिक प्रयासों में बाधा
डालने की कोशिश कर रहा था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस अहम जलमार्ग पर ईरान के नियंत्रण को चुनौती
देने और इसे फिर से व्यापार के लिए मुक्त करने के लिए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ नामक
सैन्य अभियान की शुरुआत की है। गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल
के बीच छिड़े संघर्ष के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग पूरी तरह बंद कर
दिया था, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापारिक मार्ग प्रभावित हो रहा था।
इस सैन्य अभियान की वर्तमान स्थिति और पिछले संघर्ष-विराम को लेकर अमेरिकी सेंट्रल
कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने कोई भी स्पष्ट टिप्पणी करने से इनकार कर
दिया है। हालांकि, 8 अप्रैल को घोषित किया गया संघर्ष-विराम अभी भी चर्चा में
है, लेकिन धरातल पर स्थितियां काफी हिंसक बनी हुई हैं। यह ताजा सैन्य टकराव उस समय
हुआ है जब ईरान ने क्षेत्र में अपना आक्रामक रुख और कड़ा कर दिया है। इसमें सोमवार
को संयुक्त अरब अमीरात पर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमले भी शामिल हैं, जिससे क्षेत्र
में अस्थिरता और बढ़ गई है।
ब्रैड कूपर के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) ने उन जहाजों को
निशाना बनाकर कई मिसाइलें, ड्रोन और छोटी नावें भेजी हैं, जिनकी सुरक्षा की
जिम्मेदारी अमेरिकी सेना संभाल रही है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने
अपने रक्षात्मक हथियारों के सटीक उपयोग से इन सभी खतरों को समय रहते नाकाम कर
दिया है। कूपर ने ईरानी सैन्य बलों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि वे
अमेरिकी सैन्य संपत्तियों से पर्याप्त दूरी बनाए रखें, क्योंकि वाशिंगटन ने अब
अपना बड़ा ऑपरेशन पूरी क्षमता के साथ शुरू कर दिया है।
‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ अभियान की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि
इसमें लगभग 15,000 अमेरिकी सैनिक तैनात किए गए हैं। इसके साथ ही अमेरिकी नौसेना
के अत्याधुनिक विध्वंसक जहाज, 100 से अधिक जमीन और समुद्र आधारित लड़ाकू विमान और
पानी के भीतर काम करने वाली विशेष संपत्तियां भी इस मिशन का हिस्सा हैं। कूपर
ने स्पष्ट किया कि मौके पर तैनात अमेरिकी कमांडरों को अपनी टुकड़ियों और
व्यापारिक जहाजों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक सैन्य कदम उठाने के
पूर्ण अधिकार दिए गए हैं।
इस बीच सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक दक्षिण कोरियाई जहाज में विस्फोट होने
की सूचना प्राप्त हुई। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए डोनल्ड ट्रंप ने सोशल
मीडिया पर कहा कि वह दक्षिण कोरियाई जहाज अमेरिकी ऑपरेशन का हिस्सा नहीं
था। ट्रंप ने यह भी सुझाव दिया कि दक्षिण कोरिया को भी ईरान के करीब जहाजों
की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के अमेरिकी प्रयासों में शामिल हो जाना
चाहिए। ट्रंप का अनुमान है कि इस मुठभेड़ में अमेरिका ने ईरान की कुल सात
तेज रफ्तार नावों को डुबो दिया है।
अमेरिकी रणनीति के अनुसार, इस जलमार्ग को खोलने का कार्य कई चरणों में नियोजित किया
गया है। सबसे पहले अमेरिकी सेना ने मार्ग में बिछाई गई ईरानी बारूदी सुरंगों को साफ
किया। इसके पश्चात, सोमवार को ही अमेरिका का झंडा लगे दो वाणिज्यिक जहाजों को इस
रास्ते से सुरक्षित गुजारकर यह प्रमाणित किया गया कि मार्ग अब सुरक्षित है।
दूसरी ओर, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिका के इन दावों को पूरी तरह से
निराधार बताया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ घंटों के
दौरान कोई भी वाणिज्यिक जहाज इस जलडमरूमध्य से होकर नहीं गुजरा है। ईरानी
सरकारी मीडिया ने भी उन रिपोर्टों का जोरदार खंडन किया है जिनमें ईरानी जहाजों को
डुबोने की बात कही गई है। इस विरोधाभासी स्थिति ने खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की
संभावनाओं को और अधिक बल दे दिया है।
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