केदारनाथ। केदारनाथ धाम में शुक्रवार को तीर्थ पुरोहितों का आक्रोश
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के
अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के खिलाफ फूट पड़ा। चारधाम यात्रा के दौरान
बढ़ते वीआईपी कल्चर और विशिष्ट अतिथियों को दी जा रही विशेष प्राथमिकता से
नाराज तीर्थ पुरोहितों ने मंदिर परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस
दौरान पुरोहितों ने बीकेटीसी अध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी की और धाम में वीआईपी
एंट्री को तत्काल प्रभाव से बंद करने की मांग उठाई।
तीर्थ पुरोहितों का स्पष्ट कहना है कि भगवान केदारनाथ के दरबार में सभी श्रद्धालु
समान हैं, लेकिन मंदिर समिति द्वारा कुछ खास लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है।
इस वीआईपी व्यवस्था के कारण उन आम श्रद्धालुओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़
रहा है, जो घंटों से कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं।
पुरोहितों ने आरोप लगाया कि वीआईपी लोगों के आने से सुरक्षा
व्यवस्था और सामान्य दर्शन की प्रक्रिया बाधित होती है, जिसका सीधा असर
देश-दुनिया से आए आम भक्तों पर पड़ता है।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड शासन ने चारधाम यात्रा के शुरुआती एक महीने के लिए
वीआईपी दर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के आधिकारिक आदेश जारी किए थे।
सरकार का उद्देश्य था कि यात्रा के शुरुआती दौर में उमड़ने वाली भारी भीड़ को
नियंत्रित किया जा सके और आम भक्तों को सुगमता से दर्शन उपलब्ध हों।
हालांकि, तीर्थ पुरोहितों का आरोप है कि सरकारी आदेशों के बावजूद
केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में वीआईपी दर्शन का सिलसिला थमा नहीं है और
प्रभावशाली व्यक्तियों के लिए नियम ताक पर रखे जा रहे हैं।
पुरोहितों के इस उबाल के पीछे हाल ही में हुए कुछ हाई-प्रोफाइल दौरे मुख्य वजह माने
जा रहे हैं। कुछ दिन पहले मशहूर गायक कैलाश खेर ने दोनों धामों के दर्शन किए थे।
वहीं, शुक्रवार को जब दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी बाबा केदार के दर्शन के
लिए धाम पहुंचे, तो तीर्थ पुरोहितों का धैर्य जवाब दे गया। इन वीआईपी दौरों
के कारण आम श्रद्धालुओं को रोके जाने और अव्यवस्था फैलने से नाराज पुरोहितों ने
मंदिर समिति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और जमकर नारेबाजी शुरू कर दी।
आंदोलनकारी पुरोहितों ने चेतावनी दी है कि यदि मंदिर प्रशासन ने वीआईपी कल्चर पर
लगाम नहीं लगाई और शासन के आदेशों का सख्ती से पालन नहीं किया, तो वे अपना
विरोध और तेज करेंगे। उनका तर्क है कि इस प्रकार की वीआईपी संस्कृति से धाम
की धार्मिक मर्यादा और आम भक्तों की आस्था को ठेस पहुंच रही है। फिलहाल इस
हंगामे के बाद धाम में तनाव का माहौल बना हुआ है और मंदिर समिति के
अधिकारियों पर व्यवस्था सुधारने का भारी दबाव है।