Himachal: मौसम का कोप, शिमला में ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान – The Hill News

Himachal: मौसम का कोप, शिमला में ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान

शिमला। हिमाचल प्रदेश के मौसम में आए अचानक बदलाव ने बागवानों और किसानों की चिंता
बढ़ा दी है। प्रदेश की ऊंची चोटियों जैसे रोहतांग, शिंकुला, बारालाचा और कुंजुम
में हल्का हिमपात हुआ है, जिससे पूरी घाटी में ठंडक लौट आई है। वहीं, राजधानी
शिमला सहित कुफरी, फागू, ठियोग और मशोबरा जैसे क्षेत्रों में भारी ओलावृष्टि दर्ज
की गई है। इस बेमौसम ओलावृष्टि के कारण सेब के बागानों को काफी क्षति पहुंची
है। इसके साथ ही मटर, गोभी और अन्य नकदी फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है।
राज्य के निचले इलाकों में इन दिनों गेहूं की कटाई का काम चल रहा है, जो
खराब मौसम के कारण बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने आने वाले दिनों के लिए भी चेतावनी जारी की है। ताजा
पूर्वानुमान के अनुसार, 3 और 4 मई को लाहौल-स्पीति और किन्नौर को छोड़कर राज्य
के अन्य सभी जिलों में कुछ स्थानों पर 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज
हवाएं चलने और व्यापक वर्षा होने की संभावना है। हालांकि, 1 और 2 मई को अधिकांश
स्थानों पर मौसम के मुख्य रूप से साफ रहने की उम्मीद जताई गई है, लेकिन कुछ ऊंची
चोटियों पर छिटपुट हिमपात या वर्षा जारी रह सकती है।

बीते 24 घंटों के दौरान हुई बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो शिमला के
जुब्बड़हट्टी में सर्वाधिक 34 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।
इसके अलावा सराहन में 30, शिमला शहर में 20 और नाहन में 6 मिलीमीटर बारिश हुई। इस
ताजा हिमपात, ओलावृष्टि और बारिश के चलते प्रदेश के अधिकतम तापमान में दो से तीन
डिग्री की गिरावट आई है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य
से काफी कम रिकॉर्ड किया गया है। विशेष रूप से मनाली और भुंतर में तापमान सामान्य
से 6.5 डिग्री नीचे चला गया है, जबकि मंडी में यह सामान्य से 4.8 डिग्री कम
रहा।

तापमान के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में सबसे अधिक तापमान ऊना में 33.4 डिग्री
सेल्सियस दर्ज किया गया। शिमला का अधिकतम तापमान 21.2 और न्यूनतम 12.8
डिग्री रहा। वहीं लाहौल-स्पीति के ताबो में 50 किलोमीटर प्रति घंटे की
रफ्तार से सर्द हवाएं चलीं और कांगड़ा में भी मौसम काफी ठंडा रहा। न्यूनतम
तापमान में भी एक से दो डिग्री की कमी आई है। पहाड़ी इलाकों में हो रही इस
बर्फबारी और ओलावृष्टि ने मई के महीने में भी मार्च जैसी ठंड का अहसास करा
दिया है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम के इस बदलते मिजाज को देखते
हुए अपनी कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखने के उपाय करें।

 

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