देहरादून। उत्तराखंड के उच्च शिक्षा विभाग ने राजकीय विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षकों को वैश्विक स्तर का प्रशिक्षण दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के 80 विज्ञान शिक्षकों का चयन देश के अग्रणी संस्थान ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस’ (आईआईएससी) बेंगलुरु में प्रशिक्षण के लिए किया गया है। यह विशेष कार्यक्रम 27 अप्रैल से 9 मई 2026 तक संचालित होगा, जिसमें शिक्षक आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रयोगात्मक दृष्टिकोण और नवीन शिक्षण विधियों की बारीकियां सीखेंगे।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य ‘मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन एवं ज्ञानवर्धन प्रशिक्षण योजना’ के तहत प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में शोध आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना है। उच्च शिक्षा विभाग और आईआईएससी बेंगलुरु के बीच हुए समझौते (एमओयू) के तहत यह प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। इसका लाभ सीधे तौर पर प्रदेश के छात्रों को मिलेगा, क्योंकि प्रशिक्षित शिक्षक अपने संस्थानों में लौटकर विज्ञान को अधिक रोचक और व्यवहारिक तरीके से पढ़ा पाएंगे।
प्रशिक्षण के लिए चयनित 80 शिक्षकों में विभिन्न विषयों का संतुलन रखा गया है। इसमें रसायन विज्ञान के सर्वाधिक 19 शिक्षक शामिल हैं, जबकि भौतिक विज्ञान, वनस्पति विज्ञान और जंतु विज्ञान के 16-16 शिक्षकों को चुना गया है। साथ ही गणित विषय के 13 शिक्षकों को भी इस विशेष दल में शामिल किया गया है। ये सभी शिक्षक बेंगलुरु स्थित संस्थान की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में व्यवहारिक अनुभव प्राप्त करेंगे और छात्रों में वैज्ञानिक सोच को विकसित करने के प्रभावी तरीकों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
उच्च शिक्षा सचिव रणजीत सिन्हा ने इस संबंध में बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में विज्ञान की शिक्षा की गुणवत्ता में एक क्रांतिकारी सुधार आएगा। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक स्वयं आधुनिक शोध प्रणालियों से अवगत होंगे, तभी वे विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और नवाचार की भावना भर सकेंगे। शासन ने सभी संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों और उच्च शिक्षा निदेशक को इन शिक्षकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
योजना पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि प्रतिष्ठित संस्थानों में शिक्षकों को प्रशिक्षण दिलाकर राज्य की शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण और भविष्योन्मुखी बनाया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रशिक्षण के बाद शिक्षक अपने अर्जित ज्ञान को छात्रों के साथ साझा करेंगे, जिससे प्रदेश में विज्ञान आधारित शिक्षा को एक नई ऊंचाई मिलेगी। यह कार्यक्रम शिक्षकों के पेशेवर विकास के साथ-साथ राज्य के शैक्षणिक ढांचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने में मील का पत्थर साबित होगा।