नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली दूसरी महत्वपूर्ण शांति वार्ता अब संकट में घिरती नजर आ रही है। पाकिस्तान में इसी हफ्ते प्रस्तावित इस बैठक को लेकर तेहरान के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि वे इसमें शामिल नहीं होंगे। इस नाराजगी की मुख्य वजह पिछले सप्ताह के अंत में अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के झंडे वाले एक जहाज को जब्त करना बताया जा रहा है।
तेहरान और वॉशिंगटन के बीच हुआ दो सप्ताह का संघर्ष-विराम आगामी बुधवार को समाप्त होने वाला है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि संघर्ष-विराम की अवधि बढ़ाए जाने की संभावना बहुत कम है। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि नाकाबंदी और संघर्ष-विराम का उल्लंघन करके ट्रंप कूटनीतिक बातचीत को केवल समर्पण का जरिया बनाना चाहते हैं। ईरान का मानना है कि अमेरिका का असली इरादा क्षेत्र में फिर से युद्ध भड़काना है।
ईरान की संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकिर गालिबफ ने सोशल मीडिया पर अपने रुख को साफ किया है। उन्होंने कहा कि धमकियों के साये में किसी भी प्रकार की बातचीत स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि पिछले दो हफ्तों में ईरान ने युद्ध के मैदान के लिए नई रणनीतियां और दांव तैयार कर लिए हैं। गालिबफ ने यह भी संकेत दिया कि यदि अमेरिका और इजरायल के साथ फिर से युद्ध शुरू होता है, तो तेहरान के पास पलटवार के लिए “नए दांव” मौजूद हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर होने के बावजूद अमेरिका ने कहा है कि उसका प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान में होने वाली वार्ता के लिए तैयार है। वॉशिंगटन की ओर से इस दल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे। इस प्रतिनिधिमंडल में ट्रंप के मध्य-पूर्व मामलों के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल रहेंगे। अमेरिका वार्ता की मेज पर वापसी की उम्मीद जता रहा है, लेकिन जमीनी हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं।
अनिश्चितता के इस माहौल के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि यदि यह नाजुक संघर्ष-विराम बिना किसी ठोस समझौते के समाप्त होता है, तो फिर चारों तरफ बम धमाकों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ से बातचीत में एक ईरानी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ट्रंप के सार्वजनिक बयानों का तीखा लहजा और अमेरिकी नाकाबंदी बातचीत के लिए सबसे बड़ा खतरा है। उनके अनुसार, दोनों पक्ष समझौते की रूपरेखा पर लगभग सहमत थे, लेकिन ट्रंप के अतिवादी सार्वजनिक रवैये ने पूरी कूटनीतिक प्रगति को पटरी से उतारने का जोखिम पैदा कर दिया है।
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