नई दिल्ली। मणिपुर के फौगाकचाओ अवांग लीकाई इलाके में स्थित भारतीय सेना की एक चौकी को निशाना बनाकर संदिग्ध कुकी उग्रवादियों ने भीषण गोलीबारी की। पुलिस द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह घटना 25 मार्च 2026 को दोपहर लगभग 11:40 बजे घटित हुई, जब फौलजांग और गोथोल की ओर से आए हथियारबंद उग्रवादियों ने अचानक गोलियां चलाना शुरू कर दिया।
हमले का करारा जवाब देने के लिए भारतीय सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 58वीं बटालियन ने तुरंत मोर्चा संभाला। दोनों ओर से करीब 30 मिनट तक भारी गोलीबारी का सिलसिला चलता रहा। सुरक्षा बलों की कड़ी और त्वरित प्रतिक्रिया के सामने उग्रवादी टिक नहीं सके और उन्हें पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। इस घटना के बाद से ही पूरे क्षेत्र में भारी तनाव व्याप्त है और सुरक्षा व्यवस्था को अत्यंत कड़ा कर दिया गया है।
हमले के अगले दिन, 26 मार्च की सुबह से ही भारतीय सेना, सीआरपीएफ, मणिपुर पुलिस और भारतीय रिजर्व बटालियन (आईआरबी) ने मिलकर एक बड़ा संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया है। यह सघन अभियान उन पहाड़ी क्षेत्रों और रिहायशी इलाकों के आसपास चलाया जा रहा है जहाँ से उग्रवादियों ने सेना की चौकी पर हमला किया था। सुरक्षा बल लगातार स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि उग्रवादियों की किसी भी संभावित गतिविधि को नाकाम किया जा सके।
उग्रवाद के खिलाफ जारी इस व्यापक कार्रवाई के बीच सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता मिली है। पटसोई पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाके से प्रतिबंधित संगठन यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) के एक सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए सदस्य के पास से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ है और उससे पूछताछ की जा रही है। इसके साथ ही, इंफाल पश्चिम जिले और लिटान क्षेत्र के आसपास अवैध रूप से बनाए गए छह बंकरों को सुरक्षा बलों ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
प्रशासन के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य बनी हुई है, लेकिन सुरक्षा बल किसी भी प्रकार की ढील देने के पक्ष में नहीं हैं। संवेदनशील और सीमावर्ती क्षेत्रों में तलाशी अभियान और गश्त बढ़ा दी गई है। लिटान और मोंगकट चेपू जैसे हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद अधिकांश अवैध बंकरों को अब निष्क्रिय कर दिया गया है। सैनिकों को रणनीतिक रूप से उन सभी संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है जहाँ से हिंसा भड़कने की आशंका बनी रहती है। पुलिस और सेना का साझा उद्देश्य क्षेत्र में शांति स्थापित करना और उग्रवादी तत्वों का पूरी तरह सफाया करना है।
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