नई दिल्ली। पश्चिमी एशिया में जारी भीषण संघर्ष और अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर दुनिया भर में चिंताएं बढ़ गई हैं। इस बीच, भारत में पेट्रोल और डीजल की संभावित किल्लत को लेकर कई तरह की अफवाहें फैलने लगी थीं। हालांकि, देश की प्रमुख तेल कंपनियों ने इन आशंकाओं को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि भारत के पास ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है और जनता को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।
28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से स्थिति विस्फोटक बनी हुई है। इस युद्ध ने होर्मुज जलडमरूमध्य (हॉर्मुज स्ट्रेट) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग को बुरी तरह प्रभावित किया है, जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और गैस प्राप्त करता है। ईरान की जवाबी कार्रवाई और तनाव के चलते इस रास्ते से गुजरने वाले ईंधन टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। वैश्विक स्तर पर उपजे इस अवरोध के कारण भारत में भी यह सवाल उठने लगा था कि क्या सरकार ईंधन की बचत के लिए लॉकडाउन जैसे कड़े कदम उठाएगी।
देश की दिग्गज तेल कंपनियों भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने इन अटकलों पर विराम लगाते हुए आधिकारिक बयान जारी किए हैं। बीपीसीएल ने कहा कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर पेट्रोल-डीजल की कमी को लेकर चल रही खबरें पूरी तरह निराधार हैं। कंपनी ने भरोसा दिलाया कि उनकी आपूर्ति श्रृंखला सामान्य रूप से काम कर रही है और वे देश भर में निर्बाध सेवा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
इसी कड़ी में हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी के शिकार न हों। एचपीसीएल ने स्पष्ट किया कि पूरे देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) का स्टॉक प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। कंपनी ने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे घबराकर जरूरत से ज्यादा खरीदारी (पैनिक बाइंग) न करें और अपनी सामान्य खपत के अनुसार ही ईंधन लें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ईंधन की आपूर्ति स्थिर बनी हुई है।
ईंधन संकट की इन चर्चाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में संसद में अपने संबोधन के दौरान वैश्विक युद्ध के गंभीर परिणामों की ओर संकेत किया था। उन्होंने कहा था कि तेल-समृद्ध खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ी चुनौती पैदा कर सकता है। हालांकि, मौजूदा स्थिति में भारत सरकार और तेल कंपनियां हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार नजर आ रही हैं। प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि अंतरराष्ट्रीय संकट की आड़ में होने वाली कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके और आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
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