Iran: अमेरिका से गुप्त समझौते की चर्चाओं को मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने नकारा

नई दिल्ली। ईरान के साथ जारी भीषण सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के एक हालिया बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक चर्चाओं को गर्म कर दिया है। ट्रंप ने सोमवार को दावा किया था कि अमेरिका, ईरान के एक बेहद सम्मानित और प्रभावशाली व्यक्ति के साथ समझौते की दिशा में मजबूत बातचीत कर रहा है। हालांकि, ट्रंप ने उस व्यक्ति की पहचान उजागर करने से साफ इनकार कर दिया। ट्रंप ने कहा कि वे कुछ ऐसे लोगों के साथ संपर्क में हैं जो उन्हें बेहद समझदार और भरोसेमंद लगते हैं। उनके अनुसार, ईरान के भीतर के लोग भली-भांति जानते हैं कि वह व्यक्ति कौन है और हो सकता है कि अमेरिका को जिस तरह के मध्यस्थ की तलाश है, वह वही व्यक्ति हो।

ट्रंप के इस रहस्यमयी बयान के बाद मीडिया रिपोर्ट्स में कयास लगाए जाने लगे कि वह प्रभावशाली व्यक्ति ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर गालिबाफ हो सकते हैं। सीएनएन की एक रिपोर्ट में भी संभावित वार्ताकार के तौर पर गालिबाफ का नाम प्रमुखता से सामने आया। लेकिन इन खबरों के प्रसारित होने के कुछ ही घंटों के भीतर मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए स्पष्ट किया कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच किसी भी प्रकार की कोई बातचीत नहीं हो रही है।

गालिबाफ ने कड़े शब्दों में कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत की खबरें केवल ‘फेक न्यूज’ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की भ्रामक खबरों का इस्तेमाल वित्तीय और तेल बाजारों में हेरफेर करने के लिए किया जा रहा है। गालिबाफ के अनुसार, अमेरिका और इजरायल इस समय जिस कूटनीतिक और सैन्य दलदल में फंसे हुए हैं, उससे निकलने का रास्ता खोजने के लिए वे ऐसी झूठी खबरें फैला रहे हैं।

ईरानी संसद के स्पीकर गालिबाफ शुरू से ही अमेरिका और इजरायल के प्रति कड़ा रुख अपनाते रहे हैं। युद्ध शुरू होने से पहले भी उन्होंने चेतावनी दी थी कि यह संघर्ष पूरे क्षेत्र में फैल जाएगा। वर्तमान जंग के दौरान भी उन्होंने स्पष्ट किया है कि ईरान किसी युद्धविराम की गुहार नहीं लगा रहा है। गालिबाफ का मानना है कि हमलावर पक्ष को ऐसी कड़ी सजा मिलनी चाहिए कि वह भविष्य में दोबारा ईरान की ओर हमला करने की हिम्मत न कर सके।

मोहम्मद बाकिर गालिबाफ को ईरानी शासन व्यवस्था का एक अत्यंत वफादार और अनुभवी चेहरा माना जाता है। उन्होंने अपना पूरा जीवन 1979 की इस्लामी क्रांति के आदर्शों और ईरान की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के लिए समर्पित कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सत्ता के केंद्रों में उनकी गहरी पैठ है, जो उन्हें भविष्य में किसी भी संभावित कूटनीतिक समझौते में एक निर्णायक भूमिका निभाने की शक्ति देती है। फिलहाल, उनके कड़े रुख ने ट्रंप के बातचीत के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है।

 

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