Uttarakhand: उत्तराखंड के किसानों के लिए 25 करोड़ की सौगात फसलों की जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए केंद्र ने दी मंजूरी

देहरादून। उत्तराखंड के किसानों और उनकी फसलों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने राज्य के पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवरों से होने वाले कृषि नुकसान को रोकने के लिए ‘फार्म फेंसिंग’ (घेरबाड़) हेतु 25 करोड़ रुपये की धनराशि को सैद्धांतिक रूप से स्वीकृत कर दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को प्रेषित एक आधिकारिक पत्र के माध्यम से इस निर्णय की जानकारी दी है।

गौरतलब है कि उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्य में जंगली जानवरों द्वारा फसलों को नष्ट करना एक बड़ी समस्या रही है, जिससे किसान अक्सर खेती छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के किसानों के व्यापक हित और कृषि उत्पादन को सुरक्षित करने के उद्देश्य से व्यक्तिगत रूप से केंद्रीय कृषि मंत्री से मुलाकात की थी और फार्म फेंसिंग के लिए विशेष वित्तीय सहायता का अनुरोध किया था। राज्य सरकार द्वारा भेजे गए इस प्रस्ताव की गंभीरता को देखते हुए केंद्र ने अब 25 करोड़ रुपये की मंजूरी प्रदान कर दी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का हार्दिक आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की यह पहल प्रदेश के हजारों किसानों के लिए राहत की एक बड़ी खबर है। जंगली जानवरों से फसलों की रक्षा होने से न केवल किसानों की मेहनत सुरक्षित होगी, बल्कि इससे कृषि उत्पादन को भी सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी। धामी ने विश्वास जताया कि इस आर्थिक सहायता से तैयार होने वाली घेराबंदी से राज्य में खेती के प्रति युवाओं और किसानों का विश्वास फिर से बढ़ेगा।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री द्वारा उठाए गए इस कदम की सराहना की है। उन्होंने कहा कि फार्म फेंसिंग के लिए राज्य का प्रस्ताव किसानों के हित में एक अत्यंत सकारात्मक कदम है, जिससे कृषि क्षेत्र को स्थायित्व मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि इस धनराशि का उपयोग उन क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर किया जाए जहां जंगली जानवरों का आतंक सबसे अधिक है। इस योजना के लागू होने से न केवल फसलें बचेंगी, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी कमी आने की संभावना है। राज्य का कृषि विभाग अब इस राशि के सदुपयोग और घेराबंदी के कार्यों को धरातल पर उतारने की तैयारी में जुट गया है।

 

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