Uttarakhand: राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत उत्तराखंड में क्लस्टर खेती और जैविक उत्पादों को मिलेगा बढ़ावा

देहरादून। उत्तराखंड सचिवालय में शुक्रवार को मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कृषि योजना की राज्य स्तरीय संस्तुति समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वार्षिक कार्य योजना पर गहन मंथन किया गया, जिसके बाद समिति ने प्रस्तावित योजनाओं को अपनी संस्तुति प्रदान कर दी। मुख्य सचिव ने इस दौरान कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने और किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए।

आनंद बर्द्धन ने बैठक में स्पष्ट किया कि वार्षिक कार्य योजना से संबंधित अगली समीक्षा बैठक दिसंबर या जनवरी माह में ही आयोजित की जानी चाहिए ताकि समय रहते लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके। उन्होंने किसान मानधन योजना की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस योजना का लाभ प्रत्येक पात्र किसान तक पहुँचना चाहिए। इसके लिए उन्होंने व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करने और पंजीकरण प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के क्रियान्वयन को लेकर मुख्य सचिव ने विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस योजना का शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश भर में विशेष कैंपों का आयोजन किया जाए। इसके साथ ही, भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए आधार आधारित भुगतान प्रणाली और ई-केवाईसी की अनिवार्यता को कड़ाई से लागू करने की बात कही। मुख्य सचिव का मानना है कि डिजिटल माध्यमों को मजबूती देने से पात्र लाभार्थियों तक बिना किसी बाधा के सहायता राशि पहुँच सकेगी।

उत्तराखंड की खेती को आधुनिक और व्यावसायिक बनाने के लिए उन्होंने किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के सुदृढ़ीकरण पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे क्लस्टर आधारित खेती पर अपना ध्यान केंद्रित करें, जिससे उत्पादन और विपणन दोनों में सुगमता आए। राज्य में जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने नई रणनीतियों पर काम करने के निर्देश दिए। इसके अलावा, छोटे और सीमांत किसानों की मशीनीकरण तक पहुँच आसान बनाने के लिए प्रदेश में अधिक से अधिक फार्म मशीनरी बैंक स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और उनके लिए उचित बाजार व्यवस्था सुनिश्चित करना भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। मुख्य सचिव ने स्थानीय फसलों के लिए बाजार सुविधाओं को और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए ताकि किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिले और उन्हें अपनी उपज का अधिकतम मूल्य प्राप्त हो सके। इस उच्च स्तरीय बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, एस.एन. पाण्डेय और शासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को तय समय सीमा के भीतर लक्ष्यों को पूरा करने के लिए मुस्तैदी से काम करने को कहा है।

 

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