देहरादून। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य के विकास और सुरक्षा को लेकर दो महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठकें कीं। एक ओर जहां उन्होंने टिहरी झील क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की रूपरेखा तैयार की, वहीं दूसरी ओर आगामी मानसून सीजन के मद्देनजर आपदा प्रबंधन और जनसुविधाओं की तैयारियों की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास योजनाओं में भविष्य की जरूरतों का ध्यान रखा जाए और मानसून के दौरान जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए विभाग चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रहें।
टिहरी झील क्षेत्र बनेगा ‘ग्लोबल डेस्टिनेशन’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वन स्टेट वन ग्लोबल डेस्टिनेशन’ विजन के तहत टिहरी झील और उसके आसपास के क्षेत्र को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। आनंद बर्द्धन ने निर्देश दिए कि इसके लिए एक व्यापक और संपूर्ण कार्ययोजना तैयार की जाए। टिहरी विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (टाडा) इस परियोजना के लिए डेस्टिनेशन मैनेजमेंट ऑर्गनाइजेशन के रूप में कार्य करेगा। इस योजना में रिंग रोड का निर्माण, भव्य आइकोनिक ब्रिज, हरे-भरे पैदल मार्ग, वेलनेस सेंटर और ईको पार्क शामिल होंगे। मुख्य सचिव ने एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी पर जोर देते हुए वाटरड्रोम, वाटरपोर्ट और सी-प्लेन की संभावनाओं के अनुरूप बुनियादी ढांचे के विकास के निर्देश दिए हैं।
मानसून पूर्व सड़कों को गड्ढामुक्त करने का अल्टीमेटम
आगामी मानसून सीजन को देखते हुए मुख्य सचिव ने लोक निर्माण विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं कि मानसून शुरू होने से पहले प्रदेश की सभी सड़कों को गड्ढामुक्त कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा संचालित हो रही है, इसलिए यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। बिजली और पेयजल विभागों को निर्देश दिए गए कि वे अपनी लाइनों और ट्रांसफार्मरों की मरम्मत पहले ही कर लें ताकि आपदा के समय आपूर्ति कम से कम समय के लिए प्रभावित हो। नगर निकायों को नालों की सफाई सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि जलभराव की स्थिति न बने।
खाद्यान्न भंडारण और स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर
मुख्य सचिव ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को निर्देशित किया कि आपदा संभावित और दूरस्थ क्षेत्रों में गैस, राशन, डीजल और पेट्रोल का पर्याप्त स्टॉक पहले ही जमा कर लिया जाए। स्वास्थ्य विभाग को जलजनित और संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए फॉगिंग अभियान चलाने और स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए गए हैं। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को एयरलिफ्ट करने के लिए हेली एंबुलेंस सेवाओं को भी तैयार रखने को कहा गया है। संवेदनशील मार्गों पर सड़क खोलने के लिए पहले से ही जेसीबी मशीनों और बैली ब्रिज के भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
तकनीकी निगरानी और फर्जी खबरों पर कानूनी कार्रवाई
आपदा प्रबंधन की सटीकता के लिए राज्य में स्थापित 525 हाइड्रोमेट सेंसरों और सेटेलाइट फोनों की नियमित टेस्टिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में राज्य में तीन डॉप्लर वेदर रडार सक्रिय हैं और तीन और लगाए जाने की प्रक्रिया चल रही है। मुख्य सचिव ने सोशल मीडिया पर आपदा से संबंधित भ्रामक सूचनाएं और फर्जी वीडियो प्रसारित करने वालों पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिए कि अफवाह फैलाकर जनता में डर पैदा करने वालों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
बैठक में सचिव विनोद कुमार सुमन, सचिन कुर्वे, पंकज कुमार पाण्डेय, धीराज गर्ब्याल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्य सचिव ने अंत में दोहराया कि संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी, लेकिन धरातल पर काम की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित होनी चाहिए।