Iran: मध्य पूर्व में युद्ध के साये में फीका पड़ा ईद का जश्न

यरुशलम/तेहरान। पूरी दुनिया में जहां ईद-उल-फितर का उल्लास देखने को मिल रहा है, वहीं मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के देशों में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग ने त्योहार की खुशियों को फीका कर दिया है। युद्ध के कारण उपजे तनाव ने इस बार ईद के पारंपरिक जश्न पर गहरा असर डाला है। हालात ऐसे हैं कि ईरान के बाजार वीरान पड़े हैं और सुरक्षा कारणों से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर व कुवैत जैसे देशों में खुले मैदानों में सामूहिक नमाज पढ़ने पर पूरी तरह पाबंदी लगानी पड़ी है।

इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि इजरायल के यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद को ईद की नमाज के लिए बंद रखा गया। साल 1967 के अरब-इजरायल युद्ध के बाद यह पिछले 60 वर्षों में पहला मौका है, जब इस मस्जिद को नमाजियों के लिए पूरी तरह बंद किया गया हो। ज्ञात हो कि मक्का और मदीना के बाद अल-अक्सा मस्जिद को मुस्लिम समुदाय के लिए तीसरा सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। 28 फरवरी से ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से ही इजरायली अधिकारियों ने यहां आम लोगों की एंट्री पर रोक लगा रखी है। वर्तमान में केवल स्थानीय निवासियों और दुकानदारों को ही अंदर जाने की इजाजत दी गई है।

क्षेत्र में तनाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 6 मार्च से ही अल-अक्सा मस्जिद, पश्चिमी वॉल और ‘चर्च ऑफ द होली सेपल्कर’ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को बंद रखा गया है। पूरे इजरायल में भीड़ जमा होने पर सख्त पाबंदी है। शुक्रवार को ईद के मौके पर यरुशलम के पुराने शहर के प्रवेश द्वार पर उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब नमाज के लिए पहुंचे सैकड़ों नमाजियों और पुलिस बल के बीच हिंसक झड़प हो गई।

वहीं, ईरान में भी शुक्रवार को ईद का त्योहार मनाया गया, लेकिन बाजारों में रौनक गायब रही। लोगों ने जंग के साये और भारी तनाव के बीच सादगी से नमाज अदा की। इस दौरान इजरायली हमलों में मारे गए मासूम बच्चों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। रमजान खत्म होने के बाद देशभर की मस्जिदों और अन्य धार्मिक स्थलों पर लोगों ने दुआएं कीं, लेकिन जश्न का माहौल पूरी तरह गायब था।

क्षेत्र के अन्य देशों की बात करें तो यूएई में ईद पर चार दिनों की छुट्टी की घोषणा की गई है। वहां मॉल और सार्वजनिक स्थानों पर सजावट जरूर दिखी, लेकिन सुरक्षा के कड़े इंतजामों के कारण लोगों में एक अनजाना सा डर बना हुआ था। इराक में भी युद्ध का सीधा असर आम लोगों की जिंदगी और त्योहार के उत्साह पर पड़ा है। मध्य पूर्व के इन तमाम इलाकों में इस बार ईद की खुशियों से ज्यादा युद्ध की विभीषिका और भविष्य की चिंता चर्चा का विषय बनी रही।

 

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