देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है। हाल ही में बंगाल, असम और पुडुचेरी के चुनाव परिणामों में मिली सफलता से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी जहां राज्य में अपनी सांगठनिक मशीनरी को और अधिक धार देने में जुटी है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस गुटीय खींचतान और आंतरिक साजिशों के दौर से गुजर रही है। राज्य में पिछले नौ सालों से चुनावी मात खा रही कांग्रेस के लिए ताजा घटनाक्रम ने नई मुसीबतें खड़ी कर दी हैं, जिससे पार्टी के भीतर असहजता और बेचैनी का माहौल है।
भाजपा का बढ़ता उत्साह और कांग्रेस की सुस्त चाल
भारतीय जनता पार्टी बंगाल और असम जैसे राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करने के बाद अब उत्तराखंड में जीत का परचम फहराने के लिए पूरी तरह मुस्तैद दिख रही है। संगठन स्तर पर भाजपा लगातार अपनी कमियों को दूर कर रही है। इसके ठीक उलट, कांग्रेस पार्टी 2017 से ही अपनी खोई हुई सियासी जमीन तलाशने के लिए संघर्ष कर रही है। पार्टी के भीतर की आपसी कलह और बड़े नेताओं के बीच तालमेल की कमी ने कार्यकर्ताओं के मनोबल पर बुरा असर डाला है।
राहुल गांधी के फर्जी पीए का मामला और ठगी का खेल
कांग्रेस के भीतर उपजे तनाव का ताजा कारण ठगी की एक सनसनीखेज घटना है। पकड़े गए एक व्यक्ति ने स्वयं को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का वैयक्तिक सहायक बताकर प्रदेश कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को अपने झांसे में लेने की कोशिश की। इस मामले में भावना पांडे ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है। उनका दावा है कि इस व्यक्ति ने मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष को हटाने और उसकी जगह अन्य दो नेताओं में से किसी एक को अध्यक्ष नियुक्त कराने का लालच दिया था। इस प्रकरण ने दिल्ली से लेकर देहरादून तक कांग्रेस खेमे में खलबली मचा दी है।
साजिश का सच और भावना पांडे के दावे
इस ठगी के मामले ने कई अनसुलझे सवाल खड़े कर दिए हैं। भावना पांडे का दावा है कि ठग ने उनसे 25 लाख रुपये ऐंठ लिए। अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि आखिर इतनी बड़ी रकम किस मकसद के लिए दी गई थी? क्या पर्दे के पीछे कोई और बड़ा खिलाड़ी है? हाल के दिनों में भावना पांडे द्वारा सोशल मीडिया पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोलना भी इस विवाद को और हवा दे रहा है। पार्टी के भीतर यह संदेह भी गहरा रहा है कि क्या इस पूरे प्रकरण में किसी को मोहरा बनाया गया है।
कुमारी सैलजा का दौरा और सांगठनिक गतिरोध
पार्टी में व्याप्त इस भारी तनाव के बीच प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा बुधवार से गढ़वाल मंडल के दौरे पर आ रही हैं। वे ऋषिकेश, टिहरी, चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों का दौरा कर संगठन की नब्ज टटोलेंगी। हालांकि उनके स्वागत में नेता एकजुटता का दिखावा करेंगे, लेकिन असल चुनौती आपसी गुटबाजी को खत्म करने की है। खींचतान का आलम यह है कि प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल पिछले नौ महीनों से अपनी प्रदेश टीम तक घोषित नहीं कर पाए हैं, जबकि वे इसके लिए कई बार दिल्ली के चक्कर लगा चुके हैं।
गणेश गोदियाल का पक्ष और हाईकमान की भूमिका
ताजा घटनाक्रम और पार्टी के भीतर रची जा रही कथित साजिशों पर प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे इस पूरे मामले पर पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ मंत्रणा करेंगे। गोदियाल का कहना है कि इस षड्यंत्र में जो भी लोग शामिल हैं, उनके बारे में विस्तार से पार्टी हाईकमान को जानकारी दी जाएगी। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कुमारी सैलजा के दौरे के बाद उत्तराखंड कांग्रेस इस आंतरिक संकट और साजिशों के जाल से कैसे बाहर निकल पाती है।