शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। वीरवार को सदन की कार्यवाही के दौरान उन्होंने जानकारी दी कि राज्य के विभिन्न विभागों में सेवाएं दे रहे मल्टी टास्क वर्करों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार एक नई नीति तैयार करने जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस नीति को अंतिम रूप देने से पहले कानूनी राय ली जाएगी, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की वैधानिक अड़चन न आए। यह जानकारी उन्होंने विधायक सतपाल सिंह सत्ती द्वारा पूछे गए एक सवाल के उत्तर में हस्तक्षेप करते हुए दी।
इससे पहले चर्चा में भाग लेते हुए लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि मल्टी टास्क वर्करों से जुड़ी मौजूदा नीति पिछली सरकार के कार्यकाल में बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार इन कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील है और उनके आर्थिक हितों का ध्यान रख रही है। उन्होंने बताया कि पहले इन वर्करों को 4,000 रुपये मानदेय दिया जाता था, जिसे मौजूदा सरकार ने बढ़ाकर पहले 4,500 रुपये किया और अब यह राशि 5,500 रुपये तक पहुंच चुकी है। इन कर्मियों के कार्यों का निर्धारण विभाग के सहायक और कनिष्ठ अभियंताओं द्वारा किया जाता है।
सदन में आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण और उनकी छंटनी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। भाजपा विधायक दीपराम ने मुद्दा उठाया कि एक साल पहले पूछे गए उनके सवाल का जवाब अब तक नहीं मिला है। उन्होंने सरकार से मांग की कि कम से कम उन कर्मचारियों का आंकड़ा सार्वजनिक किया जाए जिन्हें नौकरी से निकाला गया है। इस पर मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि संबंधित जानकारी जल्द ही विधायक को उपलब्ध करवा दी जाएगी।
इस मुद्दे पर हमलावर रुख अपनाते हुए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कांग्रेस पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय पहली कैबिनेट में एक लाख नौकरियां देने का वादा किया गया था, लेकिन इसके विपरीत लगभग 15,000 आउटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर दिया गया है। जयराम ठाकुर ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आउटसोर्सिंग का काम देख रही एजेंसियां सत्ताधारी दल के नेताओं के नाम पर पंजीकृत हैं और साक्षात्कार से पहले ही उम्मीदवारों से पैसों की वसूली की जा रही है।
जयराम ठाकुर के इन आरोपों पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके पास भ्रष्टाचार या वसूली से जुड़ी कोई पुख्ता जानकारी है, तो उसे सदन के सामने पेश करें। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि जयराम ठाकुर बिना किसी ठोस सबूत के केवल राजनीतिक लाभ के लिए झूठ बोल रहे हैं, तो उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला चलाया जाएगा। इस बहस के दौरान सदन का माहौल काफी गर्माया रहा।
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