हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों के लिए एक उत्साहजनक खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग ने इस बार यह सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है कि नए शैक्षणिक सत्र के आगाज के साथ ही छात्रों के हाथों में उनकी पाठ्यपुस्तकें हों। विशेष रूप से छठी से दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों को नए सत्र के पहले ही दिन किताबें उपलब्ध करवाने की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के विभिन्न पुस्तक वितरण केंद्रों से प्रदेश के अलग-अलग जिलों और खंडों में किताबों की आपूर्ति तेजी से की जा रही है ताकि शिक्षण कार्य में किसी भी प्रकार का विलंब न हो।
हमीरपुर जिले की बात करें तो यहां शिक्षा विभाग ने अपनी वितरण प्रणाली को काफी सक्रिय कर दिया है। जिले के विभिन्न शिक्षा खंडों के ब्लॉक परियोजना अधिकारियों को उनकी मांग और विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार किताबों की खेप पहुंचाई जानी शुरू कर दी गई है। विभाग का मुख्य लक्ष्य यह है कि समय रहते सभी दूरदराज के स्कूलों तक भी पुस्तकें पहुंच जाएं। अभी तक मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, हमीरपुर जिले के नादौन, हमीरपुर और सुजानपुर जैसे प्रमुख शिक्षा खंडों में पुस्तकों का बड़ा स्टॉक पहुंच चुका है। इन क्षेत्रों के संबंधित स्कूल अब अपने-अपने ब्लॉक परियोजना अधिकारियों से संपर्क कर अपनी आवश्यकता के अनुसार किताबें प्राप्त करने की प्रक्रिया में जुट गए हैं।
शिक्षा विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू किया है। जिन खंडों में अभी तक पुस्तकें नहीं पहुंची हैं, वहां भी अगले एक-दो दिनों के भीतर स्टॉक पहुंचने की पूरी संभावना है। विशेष रूप से गलोड़ और बिझड़ी शिक्षा खंडों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सोमवार या मंगलवार तक हर हाल में अपने हिस्से की पुस्तकों की खेप उठा लें। इस आदेश का उद्देश्य यह है कि वितरण प्रक्रिया में कोई तकनीकी या प्रशासनिक बाधा न आए और मार्च के अंत तक सभी स्कूलों के पास पर्याप्त मात्रा में पुस्तकों का भंडार मौजूद हो।
हमीरपुर जिले में इस योजना का लाभ उठाने वाले स्कूलों की संख्या काफी बड़ी है। जिले के कुल 161 सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक और उच्च विद्यालयों के बच्चों को इस योजना के तहत कवर किया जा रहा है। सरकार की नीति के अनुसार, छठी से दसवीं कक्षा तक के सभी विद्यार्थियों को हर वर्ष पूरी तरह से निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें प्रदान की जाती हैं। सत्र 2026-27 के लिए भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए विभाग ने समयबद्ध आपूर्ति पर जोर दिया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि सत्र के पहले दिन ही किताबें मिल जाती हैं, तो शिक्षक और छात्र दोनों ही मानसिक रूप से पढ़ाई के लिए तैयार रहते हैं और शुरुआती दिनों का समय बर्बाद नहीं होता।
आमतौर पर देखा गया है कि शैक्षणिक सत्र शुरू होने के कई हफ्तों बाद तक विद्यार्थियों को किताबों का इंतजार करना पड़ता था, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती थी। लेकिन इस बार स्कूल शिक्षा बोर्ड ने वितरण केंद्रों के माध्यम से अग्रिम योजना बनाई है। हमीरपुर के स्कूलों में अब प्रधानाचार्यों और शिक्षकों ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है ताकि वे अपने ब्लॉक कार्यालयों से किताबें लाकर उनका वर्गीकरण कर सकें और सत्र के पहले दिन आयोजित होने वाले स्वागत समारोह के दौरान बच्चों को यह उपहार स्वरूप प्रदान की जा सकें।
इस पूरी व्यवस्था और वितरण की निगरानी कर रहे जिला प्रभारी विनीत शर्मा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि तीन महत्वपूर्ण शिक्षा खंडों में पहले ही किताबें उपलब्ध करवा दी गई हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि शेष बचे खंडों में भी बहुत जल्द स्टॉक पहुंच जाएगा और किसी भी स्तर पर किताबों की कमी नहीं होने दी जाएगी। विनीत शर्मा ने सभी स्कूलों के मुखियाओं को यह स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपनी मांग के विवरण के साथ समय रहते पुस्तकें प्राप्त कर लें ताकि अंतिम समय में कोई अव्यवस्था न फैले।
प्रदेश सरकार का यह कदम न केवल गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए आर्थिक राहत प्रदान करने वाला है, बल्कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने की दिशा में भी एक सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है। जब विद्यार्थियों को समय पर संसाधन मिलते हैं, तो उनका रुझान सरकारी शिक्षा व्यवस्था के प्रति बढ़ता है। हमीरपुर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग अब पूरी तरह से इस मिशन मोड में कार्य कर रहे हैं कि नए सत्र का पहला दिन विद्यार्थियों के लिए नई किताबों की खुशबू और ज्ञान के नए संकल्प के साथ शुरू हो। आने वाले कुछ दिनों में वितरण का यह कार्य पूरी तरह संपन्न हो जाएगा और सभी 161 स्कूलों में पुस्तकों का सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित कर लिया जाएगा।
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