नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा बाजार में उस समय हड़कंप मच गया जब डोनल्ड ट्रंप के एक करीबी सहयोगी ने अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों को लेकर एक बड़ा दावा किया और फिर उसे रहस्यमयी तरीके से हटा लिया। मामला होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से जुड़ा है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग माना जाता है। डोनल्ड ट्रंप के सहयोगी ने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ यह घोषणा की थी कि अमेरिकी नेवी ने इस संकटग्रस्त क्षेत्र से एक ऑयल टैंकर को सफलतापूर्वक सुरक्षा प्रदान करते हुए बाहर निकाला है, लेकिन कुछ ही समय बाद इस दावे से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट को डिलीट कर दिया गया, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।
क्या था पूरा मामला और सोशल मीडिया पर किया गया दावा
अमेरिका के एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की थी। इस पोस्ट में उन्होंने बड़े गर्व के साथ यह जानकारी दी थी कि अमेरिकी नौसेना ने वैश्विक बाजार में तेल के निरंतर प्रवाह को बनाए रखने के लिए एक साहसिक कदम उठाया है। उन्होंने लिखा था कि अमेरिकी नेवी ने होर्मुज जलडमरूमध्य से एक ऑयल टैंकर को सफलतापूर्वक एस्कॉर्ट किया है। इस पोस्ट का उद्देश्य दुनिया को यह संदेश देना था कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सक्रिय है। हालांकि, जैसे ही यह पोस्ट सार्वजनिक हुई, रणनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा शुरू हो गई, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि कुछ ही मिनटों बाद इस पोस्ट को बिना किसी स्पष्टीकरण के हटा लिया गया।
व्हाइट हाउस की सफाई और दावे का खंडन
जब एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट के इस दावे पर सवाल उठने लगे और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में खबरें चलने लगीं, तो व्हाइट हाउस को इस पर सफाई देने के लिए सामने आना पड़ा। व्हाइट हाउस ने क्रिस राइट के दावे के ठीक उलट बयान जारी किया। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने एक आधिकारिक ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि वर्तमान में अमेरिकी नौसेना ने किसी भी ऑयल टैंकर या जहाज को होर्मुज जलडमरूमध्य से एस्कॉर्ट नहीं किया है। उन्होंने हालांकि यह जरूर जोड़ा कि भविष्य में यह एक विकल्प हो सकता है, लेकिन फिलहाल ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। व्हाइट हाउस के इस बयान ने यह साफ कर दिया कि डोनल्ड ट्रंप के सहयोगी द्वारा किया गया दावा जमीनी हकीकत से मेल नहीं खा रहा था।
वैश्विक तेल बाजार में मची भारी हलचल
क्रिस राइट के एक गलत पोस्ट ने वैश्विक बाजार को हिलाकर रख दिया। जैसे ही एनर्जी सेक्रेटरी ने अमेरिकी नेवी द्वारा टैंकर को एस्कॉर्ट करने की खबर पोस्ट की, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में अचानक और तेजी से गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को लगा कि तनावपूर्ण क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित होने से आपूर्ति में बाधा नहीं आएगी। लेकिन जैसे ही पोस्ट को डिलीट किया गया और दावे पर संदेह पैदा हुआ, तेल की कीमतों ने फिर से रिकवरी करना शुरू कर दिया और जो नुकसान हुआ था, उसकी कुछ हद तक भरपाई हो गई। बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विरोधाभासी बयानों से निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ती है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है।
ईरान का पलटवार और दावे को बताया झूठ
होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ का दावा करने वाले ईरान ने भी इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह झूठ करार दिया। ईरान की ओर से कहा गया कि अमेरिकी नौसेना के किसी भी जहाज में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य के पास भी आ सके। इसके साथ ही तेहरान ने एक सख्त चेतावनी भी जारी की। ईरान का कहना है कि जब तक इस क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बनी रहेगी, तब तक खाड़ी के इस हिस्से से तेल का निर्यात पूरी तरह सुरक्षित नहीं होगा। ईरान के इस रुख ने क्षेत्र में पहले से ही व्याप्त तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है।
ऊर्जा विभाग की तकनीकी सफाई
इस पूरी फजीहत के बाद अमेरिका के ऊर्जा विभाग ने अपनी गलती स्वीकार करने की कोशिश की। विभाग के एक प्रवक्ता ने न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया कि क्रिस राइट के आधिकारिक एक्स अकाउंट से एक वीडियो क्लिप हटाई गई थी क्योंकि वह गलत थी। प्रवक्ता के अनुसार, ऊर्जा विभाग के स्टाफ ने उस वीडियो को गलत कैप्शन दे दिया था, जिसके कारण यह गलतफहमी पैदा हुई। विभाग ने इसे एक मानवीय त्रुटि और गलत जानकारी साझा होने का मामला बताया है।
कुल मिलाकर, इस घटनाक्रम ने डोनल्ड ट्रंप प्रशासन के सहयोगियों और व्हाइट हाउस के बीच समन्वय की कमी को भी उजागर किया है। एक संवेदनशील जलक्षेत्र, जहां दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल आपूर्ति के लिए निर्भर है, वहां इस तरह के भ्रामक दावों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका की स्थिति को असहज कर दिया है। फिलहाल इस मामले ने यह साबित कर दिया है कि मिडिल ईस्ट के मौजूदा संकट के बीच एक छोटी सी गलत जानकारी भी वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीतिक संबंधों पर बड़ा असर डाल सकती है। होर्मुज स्ट्रेट अभी भी तनाव का केंद्र बना हुआ है और दुनिया की नजरें अब अमेरिकी नेवी की अगली वास्तविक गतिविधि पर टिकी हैं।