नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच यूरोप को तेल और गैस की आपूर्ति फिर से शुरू करने का संकेत दिया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह सहयोग तभी संभव होगा जब यूरोप कुछ विशेष शर्तों का पालन करेगा। पुतिन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के करीब एक-पांचवें हिस्से के कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की ढुलाई के लिए जीवन रेखा माना जाता है।
सोमवार को सरकारी अधिकारियों और रूस के बड़े तेल-गैस घरानों के प्रमुखों के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान पुतिन ने अपनी रणनीति साझा की। उन्होंने कहा कि यदि यूरोपीय कंपनियां और खरीदार लंबे समय तक चलने वाले स्थिर सहयोग के लिए तैयार हैं, तो रूस आपूर्ति के मामले में कभी पीछे नहीं हटेगा। रूसी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर तेल उत्पादन अगले एक महीने के भीतर पूरी तरह ठप हो सकता है। वर्तमान में क्षेत्र में उत्पादन घट रहा है और स्टोरेज टैंक भरते जा रहे हैं क्योंकि निर्यात का रास्ता बंद होने से तेल को बाहर निकालना संभव नहीं हो पा रहा है।
इस भू-राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर बाजार पर पड़ा है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं। एक समय तो यह 119 डॉलर तक पहुँच गई, जो 2022 में यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। केवल रविवार को ही तेल की कीमतों में 30 प्रतिशत से अधिक का उछाल दर्ज किया गया, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा की कमी का डर सताने लगा है।
उल्लेखनीय है कि यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोपीय देशों ने रूस पर अपनी निर्भरता को काफी हद तक कम कर दिया था। साल 2022 में यूरोपीय संघ ने रूसी कच्चे तेल के समुद्री आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। जो आपूर्ति पाइपलाइनों के जरिए हो रही थी, वह भी क्षतिग्रस्त होने के कारण लगभग बंद है। युद्ध से पहले यूरोप अपनी 40 प्रतिशत गैस रूस से खरीदता था, जो 2025 तक घटकर केवल 13 प्रतिशत रह गई थी।
पुतिन ने अब इस संकट को रूस के लिए एक नए अवसर के रूप में देखा है। उन्होंने अपनी कंपनियों को इस स्थिति का आर्थिक लाभ उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यदि यूरोप राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर व्यावसायिक आधार पर सहयोग चाहता है, तो रूस तैयार है। इस बीच, हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने यूरोपीय संघ से अपील की है कि कीमतों को नियंत्रित करने के लिए रूसी ईंधन पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं। दूसरी ओर, G7 देशों ने कीमतों पर लगाम लगाने के लिए जरूरी कदम उठाने की बात तो कही है, लेकिन अपने आपातकालीन भंडार को खोलने का कोई ठोस वादा नहीं किया है। फिलहाल, रूस अपनी आपूर्ति का रुख यूरोप से हटाकर अन्य बाजारों की ओर करने पर भी विचार कर रहा है।