Uttarakhand: उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में रिकॉर्ड उछाल और जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से अधिक का सुधार

देहरादून। उत्तराखंड की आर्थिक प्रगति की एक नई और उत्साहजनक तस्वीर सामने आई है। राज्य सरकार द्वारा जारी नवीनतम आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश की अर्थव्यवस्था ने पिछले तीन वर्षों में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने गुरुवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में इस रिपोर्ट के महत्वपूर्ण आँकड़े साझा किए। इस वर्ष का सर्वेक्षण ‘नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च’ (एनसीएईआर) के सहयोग से तैयार किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में उत्तराखंड का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 3,81,889 करोड़ रुपये रहा है। यदि इसकी तुलना वर्ष 2021-22 के 2.54 लाख करोड़ रुपये के आँकड़े से की जाए, तो इसमें डेढ़ गुना से भी अधिक की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आर्थिक विकास का यह लाभ आम नागरिकों तक भी पहुँचा है, जिसका प्रमाण प्रति व्यक्ति आय में हुई वृद्धि है। वर्ष 2021-22 में राज्य की प्रति व्यक्ति आय 1,94,670 रुपये थी, जो अब बढ़कर 2,73,921 रुपये हो गई है।

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 2024-25 में राज्य की विकास दर 7.23 प्रतिशत रही है, जबकि आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जीएसडीपी 8.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। गरीबी निवारण के मोर्चे पर भी राज्य को बड़ी सफलता मिली है। ‘मल्टी डायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स’ 9.7 प्रतिशत से घटकर अब 6.92 प्रतिशत पर आ गया है। रोजगार के क्षेत्र में भी सुधार हुआ है और ‘लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट’ बढ़कर 64.4 प्रतिशत पहुँच गया है।

औद्योगिक मोर्चे पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की संख्या 59,798 से बढ़कर 79,394 हो गई है, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। स्टार्टअप्स के क्षेत्र में उत्तराखंड ने लंबी छलांग लगाई है। साल 2017 तक प्रदेश में स्टार्टअप्स की संख्या शून्य थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 1,750 हो गई है।

बुनियादी ढांचे की बात करें तो सड़कों की कुल लंबाई अब 51,278 किमी हो गई है। हवाई संपर्क को मजबूत करने के लिए हेलीपोर्ट की संख्या 2 से बढ़ाकर 7 और हेलीपैड की संख्या 60 से बढ़ाकर 118 की गई है। शिक्षा के क्षेत्र में स्कूलों में ड्रॉपआउट दर में कमी आई है और उच्च शिक्षण संस्थानों व इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या में भी विस्तार हुआ है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के कारण शिशु और मातृ मृत्यु दर में गिरावट आई है, वहीं प्रदेश में औसत जीवन प्रत्याशा अब 73 वर्ष हो गई है। सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में राज्य ने रिकॉर्ड बनाया है, जहाँ उत्पादन क्षमता 439 मेगावाट से बढ़कर 1027 मेगावाट तक पहुँच गई है। पर्यटन, डेयरी और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में भी उत्पादन और संसाधनों में भारी वृद्धि देखी गई है। सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के मामले में अब उत्तराखंड देशभर में पहले स्थान पर काबिज है।

 

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