खटीमा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने खटीमा दौरे के दूसरे दिन शनिवार को स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों के साथ सीधा संवाद किया। लोहियाहेड स्थित कैंप कार्यालय और हेलीपैड परिसर में आयोजित इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री एक ‘जनसेवक’ के रूप में नजर आए। उन्होंने क्षेत्र के विभिन्न कोनों से आए लोगों की समस्याओं को बेहद गंभीरता और धैर्य के साथ सुना। इस दौरान लोगों ने बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी अपनी शिकायतों और मांगों का पिटारा मुख्यमंत्री के सामने रखा।
पुष्कर सिंह धामी ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जनसमस्याओं का समाधान केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका असर धरातल पर दिखना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि शिकायतों के निस्तारण में प्रशासनिक संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय दिया जाए। मुख्यमंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि जो भी प्रकरण लंबित हैं, उनकी नियमित रूप से समीक्षा की जाए और एक निश्चित समय सीमा के भीतर उनका निपटारा सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आम जनता को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए एक सुदृढ़ व्यवस्था बनाई जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का मूल मंत्र ‘सरलीकरण, समाधान और निस्तारण’ है, जिसे हर अधिकारी को अपनी कार्यशैली में उतारना होगा। मुख्यमंत्री के इस रुख से स्थानीय नागरिकों में भारी उत्साह देखा गया और उन्हें उम्मीद जगी कि उनकी वर्षों पुरानी समस्याओं का अब अंत होगा।
मुलाकात के दौरान नगरपालिका अध्यक्ष रमेश चंद्र जोशी, दर्जा मंत्री फरजाना बेगम, भाजपा जिलाध्यक्ष कमल जिंदल, महामंत्री रमेश चंद्र जोशी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति सहित कई अन्य महत्वपूर्ण जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने इस दौरान क्षेत्र में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति की भी जानकारी ली और उन्हें गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा करने को कहा। बड़ी संख्या में आए क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री का आभार जताया और उन्हें अपने बीच पाकर खुशी व्यक्त की। खटीमा में मुख्यमंत्री की इस सक्रियता को सुशासन की दिशा में एक प्रभावी कदम माना जा रहा है। सरकार का संकल्प है कि अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की आवाज़ सीधे सत्ता के शीर्ष तक पहुँचे।