देहरादून। उत्तराखण्ड में परिवहन क्षेत्र के कायाकल्प और तकनीकी सुधारों की दिशा में राज्य सरकार को बड़ी सफलता मिली है। केंद्र सरकार ने प्रदेश में किए जा रहे व्यापक सुधारों की सराहना करते हुए ‘पूंजीगत निवेश योजना’ (SASCI) 2025-26 के अंतर्गत राज्य को 105.11 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की है। इसके अतिरिक्त, अप्रैल माह से पहले लागू किए गए विभिन्न सुधारों के लिए भी 20 करोड़ रुपये की अलग से धनराशि दी गई है। इस प्रकार उत्तराखण्ड परिवहन विभाग को कुल 125 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है।
इस बड़ी उपलब्धि पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में परिवहन क्षेत्र के भीतर तकनीक आधारित सुधारों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इससे न केवल सड़क सुरक्षा को मजबूती मिल रही है, बल्कि विभागीय कामकाज में पारदर्शिता भी सुनिश्चित हुई है। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट और वाहन स्क्रैपिंग नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। केंद्र से प्राप्त इस प्रोत्साहन राशि का उपयोग राज्य के भीतर एक स्मार्ट और सुरक्षित परिवहन ढांचा विकसित करने में किया जाएगा।
परिवहन क्षेत्र में हुए सुधारों के अंतर्गत राज्य के उच्च जोखिम वाले और भारी भीड़भाड़ वाले चौराहों पर ‘इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट सिस्टम’ लागू किया गया है। इसके तहत दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे स्थापित किए गए हैं, जिन्हें सीधे ट्रैफिक कंट्रोल रूम और ई-चालान प्रणाली से जोड़ा गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर तक 20 नए स्थानों पर ये कैमरे लगाए गए, जिसके बाद राज्य में इनकी कुल संख्या 37 हो गई है। इन कैमरों की मदद से बिना हेलमेट, ओवरस्पीडिंग और ट्रिपल राइडिंग जैसे यातायात नियमों के उल्लंघन पर प्रतिदिन 5 हजार से अधिक चालान किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है जहां इन कैमरों के माध्यम से फास्टैग वॉलेट से सीधे ग्रीन सेस की वसूली की जा रही है।
इसके साथ ही राज्य में वाहन स्क्रैपिंग नीति को भी प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। पुराने वाहनों को पंजीकृत केंद्रों पर नष्ट करने के बदले मिलने वाले प्रमाण पत्र के आधार पर नए वाहन खरीदने पर रोड टैक्स में 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। अब तक राज्य में 564 सरकारी और 5861 निजी वाहनों को स्क्रैप किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, वाहनों की वैज्ञानिक जांच के लिए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों (एटीएस) की स्थापना को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
परिवहन सचिव बृजेश कुमार संत के निर्देशन में संचालित इन सुधारात्मक योजनाओं ने उत्तराखण्ड को नवाचार के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल कर दिया है। तकनीक के बढ़ते हस्तक्षेप से अब सड़क सुरक्षा और राजस्व संग्रहण दोनों ही क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहे हैं।
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