देहरादून। उत्तराखंड के शहरों में गैस पाइपलाइन नेटवर्क और सीएनजी स्टेशनों के विस्तार को गति देने के लिए मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने कमर कस ली है। राज्य में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने प्रशासन और संबंधित कंपनियों को बेहतर समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं। सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी भी तरह की प्रशासनिक ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिया कि वे अपने-अपने जिलों में गैस पाइपलाइन और सीएनजी स्टेशन स्थापित करने के लिए चिन्हित भूमि का हस्तांतरण जल्द से जल्द सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि अक्सर भूमि की उपलब्धता और अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मिलने में होने वाली देरी से परियोजनाएं लटक जाती हैं, जिसे अब हर हाल में रोका जाना चाहिए। जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे जिला स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित कर कंपनियों के समक्ष आने वाली समस्याओं और लंबित प्रकरणों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर करें।
परियोजनाओं की सघन निगरानी के लिए मुख्य सचिव ने एक नया प्रशासनिक ढांचा भी तय किया है। अब प्रत्येक जनपद में जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) को सीजीडी कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है। इसके अलावा, परियोजनाओं की प्रतिदिन की प्रगति की निगरानी के लिए हर जिले में एक विशेष अधिकारी की तैनाती भी की जाएगी। मुख्य सचिव ने कड़े लहजे में कहा कि सरकारी अनुमतियों की फाइलें अनावश्यक रूप से मेज पर नहीं रहनी चाहिए और स्वीकृतियों में होने वाले विलंब को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
प्रशासन के साथ-साथ मुख्य सचिव ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर कंपनियों की जवाबदेही भी तय की है। उन्होंने कंपनियों को निर्देशित किया कि उन्हें जो समय-सीमा और मानक दिए गए हैं, वे उनका पूरी तरह पालन करें। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पाइपलाइन बिछाने या अन्य निर्माण कार्यों के दौरान आम जनता को आवाजाही या अन्य बुनियादी सुविधाओं में कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए। कंपनियों को अपनी कार्य योजना इस तरह तैयार करने को कहा गया है कि परियोजनाएं निर्धारित समय के भीतर ही पूरी हों।
बैठक में कंपनियों के प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याओं को भी साझा किया, जिस पर मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को तत्काल समाधान निकालने के निर्देश दिए। इस समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव एल.एल. फैनई, सचिव आनंद स्वरूप, अपर सचिव (खाद्य) रुचि मोहन रयाल और विभिन्न गैस कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सरकार का मानना है कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के सुदृढ़ होने से राज्य के नागरिकों को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध हो सकेगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।