शिमला। हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की एक रिक्त सीट के लिए सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस पार्टी में उम्मीदवार के चयन को लेकर गहन मंथन का दौर शुरू हो चुका है। इस कड़ी में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बीते शुक्रवार को नई दिल्ली में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं के साथ अहम चर्चा की है।
सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा चुनाव के लिए संभावित चेहरों की सूची में पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, हिमाचल कांग्रेस की प्रभारी रजनी पाटिल और प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह का नाम सबसे आगे चल रहा है। इसके साथ ही एक चर्चित नाम स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल का भी सामने आया है, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
धनीराम शांडिल को राज्यसभा भेजने के पीछे सरकार की रणनीति मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन बनाने की हो सकती है। वर्तमान में सुक्खू कैबिनेट में शिमला संसदीय क्षेत्र का दबदबा है और वहां से पांच मंत्री शामिल हैं। मंत्रिमंडल में फिलहाल एक पद खाली है और यदि शांडिल को केंद्र की राजनीति में भेजा जाता है, तो प्रदेश सरकार में मंत्रियों के दो पद रिक्त हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री के पास नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल करने का अवसर होगा, हालांकि इसके बाद सोलन विधानसभा सीट पर उपचुनाव की स्थिति भी बन सकती है।
दावेदारों की बात करें तो आनंद शर्मा का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। वे मूल रूप से शिमला से संबंध रखते हैं और हाल ही में दिल्ली में राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को लेकर हुई महत्वपूर्ण बैठक में उनकी उपस्थिति ने कई संकेत दिए हैं। भले ही उन्होंने पार्टी के निर्देश पर पिछला लोकसभा चुनाव कांगड़ा से लड़ा था, लेकिन उनकी वरिष्ठता उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है। दूसरी ओर, प्रतिभा सिंह और रजनी पाटिल की सक्रियता भी उन्हें इस रेस में मजबूती से बनाए हुए है।
कांग्रेस के लिए यह चुनाव साख का सवाल भी है। साल 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी अभिषेक मनु सिंघवी को हार का सामना करना पड़ा था। उस कड़वे अनुभव को देखते हुए पार्टी इस बार बेहद सावधानी से कदम रख रही है। दूसरी तरफ, विपक्षी दल भाजपा भी अपनी रणनीति तैयार कर रही है और वह कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को चुनौती देने की योजना बना सकती है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने दिल्ली दौरे के दौरान केसी वेणुगोपाल और रजनी पाटिल से अलग से भी मंत्रणा की है, जिससे यह साफ है कि उम्मीदवार के नाम पर अंतिम मुहर जल्द ही लग सकती है। फिलहाल पूरी नजरें आलाकमान के फैसले पर टिकी हैं।