लखनऊ। यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए ‘जापान सिटी’ और ‘सिंगापुर सिटी’ विकसित करने का बड़ा प्रस्ताव शासन को भेजा है। प्राधिकरण ने ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में इन दोनों अंतरराष्ट्रीय शहरों के लिए जमीन चिन्हित कर ली है और जल्द ही भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की जाएगी। यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रस्तावित जापान और सिंगापुर यात्रा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यीडा के सीईओ आरके सिंह ने बताया कि सेक्टर-5A और सेक्टर-7 को इन विशेष परियोजनाओं के लिए नियोजित किया गया है। इन्हें ‘इंटीग्रेटेड औद्योगिक सिटी’ के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मास्टरप्लान के अनुसार, इन शहरों का न्यूनतम 70 प्रतिशत हिस्सा औद्योगिक गतिविधियों के लिए आरक्षित रहेगा। इसके अलावा, काम करने वाले लोगों की सुविधा के लिए 12 प्रतिशत आवासीय, 13 प्रतिशत वाणिज्यिक और 5 प्रतिशत हिस्सा संस्थागत सुविधाओं के लिए आवंटित किया गया है। जापान सिटी और सिंगापुर सिटी के लिए 500-500 एकड़ यानी कुल 1000 एकड़ भूमि का चयन किया गया है। इनका विकास ईपीसी मोड पर किया जाएगा, जिससे विदेशी निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
औद्योगिक क्रांति के साथ-साथ योगी सरकार ने कृषि क्षेत्र में भी प्राकृतिक खेती को मिशन मोड पर अपना लिया है। प्रदेश के सभी 75 जिलों में अब तक 94,300 हेक्टेयर क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य जल्द ही इस आंकड़े को एक लाख हेक्टेयर के पार ले जाने का है। इस अभियान के तहत बुंदेलखंड क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट में 23,500 हेक्टेयर क्षेत्र में गो-आधारित प्राकृतिक खेती कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।
प्राकृतिक खेती का मुख्य उद्देश्य किसानों की लागत कम करना और उनकी आय बढ़ाना है। जीवामृत और घनजीवामृत जैसे प्राकृतिक उर्वरकों के प्रयोग से रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता खत्म की जा रही है। उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, इस पद्धति से मिट्टी की जलधारण क्षमता और उपजाऊ शक्ति बढ़ रही है, जो बुंदेलखंड जैसे कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए बेहद लाभदायक है। इस प्रकार, जहां यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे अंतरराष्ट्रीय निवेश की जमीन तैयार हो रही है, वहीं ग्रामीण इलाकों में टिकाऊ कृषि व्यवस्था से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत की जा रही है।