ढाका। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने अपने विदाई भाषण में भारत के प्रति कड़ा और भड़काऊ रुख अपनाते हुए नई दिल्ली की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। शेख हसीना के तख्तापलट के बाद सत्ता संभालने वाले यूनुस का कार्यकाल सांप्रदायिक हिंसा, हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों और बढ़ते इस्लामिक चरमपंथ के लिए आलोचनाओं के घेरे में रहा है। अपनी नाकामियों को स्वीकार करने के बजाय, यूनुस ने अपने संबोधन का उपयोग भारत विरोधी भावनाओं को भड़काने और पड़ोसी देश के साथ दशकों पुराने रिश्तों पर चोट करने के लिए किया।
यूनुस ने अपने भाषण में जोर देकर कहा कि बांग्लादेश ने अब अपनी विदेश नीति में वास्तविक संप्रभुता, सम्मान और आजादी हासिल कर ली है। उन्होंने परोक्ष रूप से भारत पर निशाना साधते हुए कहा कि अब बांग्लादेश किसी दूसरे देश के निर्देशों पर नहीं चलता। उन्होंने एक भविष्य के आर्थिक एकीकरण की रूपरेखा पेश की, जिसमें नेपाल, भूटान और भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों (सेवन सिस्टर्स) को जोड़ने की बात कही। यूनुस का यह बयान भारत के लिए चौंकाने वाला है क्योंकि नई दिल्ली ने अपने उत्तर-पूर्वी राज्यों की कनेक्टिविटी के लिए बांग्लादेश के माध्यम से कई महत्वपूर्ण और महंगे प्रोजेक्ट्स में निवेश किया है। यूनुस अब इस क्षेत्र को भारत के प्रभाव से मुक्त कर एक अलग आर्थिक ब्लॉक के रूप में देख रहे हैं।
विदेश नीति में बड़े बदलावों का संकेत देते हुए यूनुस ने चीन, जापान, अमेरिका और यूरोप के साथ प्रगाढ़ होते संबंधों का गुणगान किया। उन्होंने विशेष रूप से चीन समर्थित परियोजनाओं में हुई प्रगति का उल्लेख किया, जिसमें तीस्ता नदी पहल भी शामिल है। गौर करने वाली बात यह है कि यह प्रोजेक्ट भारत के सामरिक रूप से संवेदनशील ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ (चिकन्स नेक) के अत्यंत करीब है, जिसे लेकर भारत हमेशा सतर्क रहा है। यूनुस ने चीन के सहयोग से बनने वाले 1,000 बेड वाले अस्पताल और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।
हैरानी की बात यह रही कि पूरे भाषण के दौरान मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं के खिलाफ हुई बर्बर हिंसा पर पूरी तरह चुप्पी साधे रखी। उन्होंने अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में अपनी सरकार की विफलताओं या हिंदू नागरिकों के मन में व्याप्त गहरे डर को लेकर एक शब्द भी नहीं कहा। इसके बजाय, उन्होंने अपनी सेना को और अधिक शक्तिशाली बनाने और किसी भी हमले का मुकाबला करने की तैयारी पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यूनुस का झुकाव स्पष्ट रूप से पाकिस्तान और चीन की ओर रहा है, जिसने दक्षिण एशिया के कूटनीतिक संतुलन को बिगाड़ने का काम किया है। उनके इस विदाई भाषण ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में भारत और बांग्लादेश के संबंधों में कड़वाहट और बढ़ सकती है।