खटीमा (ऊधम सिंह नगर)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने दो दिवसीय खटीमा भ्रमण के दूसरे दिन जनता के बीच पहुँचकर उनकी समस्याओं का संज्ञान लिया और प्रशासनिक अधिकारियों को तत्काल समाधान के निर्देश दिए। रविवार की सुबह से ही मुख्यमंत्री की कार्यशैली में जनसेवा और संवेदनशीलता का अनूठा संगम देखने को मिला। लोहियाहेड स्थित कैंप कार्यालय और हेलीपैड पर आयोजित जनसुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ने एक-एक कर स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता आम आदमी की समस्याओं का त्वरित और पारदर्शी निस्तारण है।
कैंप कार्यालय में आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में बड़ी संख्या में खटीमा और आसपास के क्षेत्रों से ग्रामीण अपनी शिकायतें और सुझाव लेकर पहुँचे थे। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक व्यक्ति की बात को धैर्यपूर्वक सुना और मौके पर मौजूद अधिकारियों को फाइलों के निस्तारण में देरी न करने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि जनता को अपनी जायज मांगों के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। उन्होंने विशेष रूप से सड़क, बिजली, पानी और समाज कल्याण की योजनाओं से जुड़े मसलों पर जिला प्रशासन को समयबद्ध तरीके से काम करने के आदेश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की जवाबदेही जनता के प्रति होनी चाहिए और विकास कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस दौरान ऊधम सिंह नगर के जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया और चम्पावत के जिलाधिकारी मनीष कुमार सहित पूरी प्रशासनिक मशीनरी मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रही। मुख्यमंत्री ने जनसमस्याओं के समाधान के लिए ‘सिंगल विंडो’ एप्रोच पर बल दिया ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को शहर तक न आना पड़े। उन्होंने कहा कि खटीमा उनकी कर्मभूमि है और यहाँ के लोगों का विश्वास ही उनकी असली शक्ति है। जनप्रतिनिधियों के साथ बातचीत में उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए भविष्य की रूपरेखा पर भी चर्चा की।
जनसमस्याओं को सुनने के पश्चात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का काफिला ग्राम भगचुरी के लिए रवाना हुआ। यहाँ मुख्यमंत्री का एक अत्यंत मानवीय और संवेदनशील पक्ष देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकालकर उन परिवारों के बीच पहुँचने का निर्णय लिया जो हाल ही में अपनों को खोने के गम से जूझ रहे हैं। भगचुरी पहुँचकर मुख्यमंत्री सबसे पहले मलकीत सिंह राणा के आवास पर गए, जिनका हाल ही में निधन हो गया था। उन्होंने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की और शोकाकुल परिजनों से बात कर उन्हें ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री ने परिवार को विश्वास दिलाया कि दुख की इस घड़ी में वे और पूरी सरकार उनके साथ खड़ी है।
इसके उपरांत, मुख्यमंत्री वीरेंद्र मौर्य के आवास पर पहुँचे। वीरेंद्र मौर्य की माता सुन्दरी देवी का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। मुख्यमंत्री ने सुन्दरी देवी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। उन्होंने परिवार के सदस्यों से भेंट की और माता के जीवन और उनके संघर्षों को याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवार में बुजुर्गों का जाना एक अपूरणीय क्षति होती है, लेकिन उनके संस्कार हमेशा हमारा मार्गदर्शन करते रहते हैं। शोक व्यक्त करने के दौरान मुख्यमंत्री के चेहरे पर सादगी और परिजनों के प्रति गहरा सम्मान दिखाई दिया। उन्होंने मृत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
इस पूरे भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री के साथ कई प्रमुख राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तियां मौजूद रहीं। जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य और नगर पालिका खटीमा के अध्यक्ष रमेश चंद्र जोशी ने मुख्यमंत्री को स्थानीय विकास कार्यों की प्रगति से अवगत कराया। दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू और फरजाना बेगम ने भी मुख्यमंत्री के साथ विभिन्न सामाजिक विषयों पर चर्चा की। सुरक्षा और कानून व्यवस्था की कमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा और एसपी नीहारिका तोमर ने संभाली। इसके अलावा मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी, अपर जिलाधिकारी कौस्तूभ मिश्रा और उप जिलाधिकारी तुषार सैनी भी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुटे रहे।
मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल सरकारी औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह जनता के साथ सीधे जुड़ाव का एक सशक्त माध्यम बना। हेलीपैड से लेकर गांवों की गलियों तक, लोग अपने मुख्यमंत्री का स्वागत करने और उन्हें अपनी समस्याएं बताने के लिए उत्सुक नजर आए। मुख्यमंत्री ने भी बिना किसी प्रोटोकॉल की बाधा के लोगों से हाथ मिलाया और उनकी बात सुनी। प्रशासन को दिए गए निर्देशों में उन्होंने यह भी कहा कि जिन समस्याओं का समाधान आज मौके पर नहीं हो पाया है, उनकी एक सूची तैयार की जाए और आगामी एक सप्ताह के भीतर उन पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाए।
भ्रमण के समापन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड को एक आदर्श राज्य बनाने का संकल्प तभी पूरा होगा जब हर गाँव और हर परिवार खुशहाल होगा। उन्होंने अधिकारियों से ‘सरलीकरण, समाधान और निस्तारण’ के मंत्र पर काम करने का आह्वान किया। खटीमा की जनता ने मुख्यमंत्री की इस सक्रियता और दुख-सुख में भागीदारी की सराहना की। शाम को मुख्यमंत्री अपने अगले गंतव्य के लिए रवाना हुए, लेकिन उनके इस दौरे ने स्थानीय प्रशासन और जनता के बीच संवाद के नए द्वार खोल दिए हैं। अधिकारियों को अब उन निर्देशों को धरातल पर उतारने की चुनौती होगी जो मुख्यमंत्री ने अपनी इस यात्रा के दौरान दिए हैं।
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