प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में संभल जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामले में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। यह मामला निचली अदालत द्वारा तत्कालीन क्षेत्राधिकारी अनुज चौधरी और अन्य पुलिसकर्मियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के आदेश से संबंधित है। न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है, जिसमें पुलिस अधिकारियों की ओर से ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। सोमवार को हुई बहस के बाद अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को भी जारी रखने का निर्देश दिया है।
अदालत के समक्ष राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने दलील दी कि संभल हिंसा के दौरान जो गोली बरामद हुई थी, उसकी आगरा स्थित प्रयोगशाला में वैज्ञानिक जांच कराई गई। फॉरेंसिक रिपोर्ट के हवाले से उन्होंने बताया कि जांच में मिली गोली उस श्रेणी की नहीं है जिसका उपयोग उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा किया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एफआईआर का आदेश पारित करते समय बीएनएसएस के निर्धारित प्रावधानों का उचित पालन नहीं किया। सरकार की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि संभल हिंसा के संदर्भ में पहले से ही 11 मुकदमे दर्ज हैं और पुलिस उन सभी मामलों में गहनता से जांच कर रही है, लेकिन निचली अदालत ने इन तथ्यों को नजरअंदाज कर विवादित आदेश जारी कर दिया।
पूरा विवाद 24 नवंबर 2024 को संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा से जुड़ा है। इस घटना में यामीन नामक व्यक्ति ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे। यामीन का दावा है कि तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, तत्कालीन कोतवाल अनुज तोमर और अन्य अज्ञात पुलिस कर्मियों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई थीं। आरोप के अनुसार, जब उनका बेटा आलम वहां से भागने की कोशिश कर रहा था, तब पुलिस की गोली लगने से उसकी मृत्यु हो गई। इसी शिकायत के आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने 9 जनवरी को अनुज चौधरी सहित 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।
इस आदेश को चुनौती देते हुए अनुज चौधरी और अनुज तोमर ने हाईकोर्ट की शरण ली है। अनुज चौधरी 2012 पीपीएस बैच के अधिकारी हैं और खेल कोटे से पुलिस सेवा में शामिल हुए थे। वर्तमान में वह फिरोजाबाद में अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) के पद पर तैनात हैं। सोमवार को हाईकोर्ट में शिकायतकर्ता यामीन के वकील ने अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा, जिसके बाद कोर्ट ने सुनवाई स्थगित करते हुए अगली तिथि नियत कर दी। अब मंगलवार को इस मामले में पुनः बहस होगी, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।