Uttarakhand: सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए सरकार प्रतिबद्ध, उत्तरायणी कौथिक में बोले मुख्यमंत्री धामी – The Hill News

Uttarakhand: सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए सरकार प्रतिबद्ध, उत्तरायणी कौथिक में बोले मुख्यमंत्री धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी परेड ग्राउंड में सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा आयोजित चार दिवसीय ‘उत्तरायणी कौथिक महोत्सव’ के समापन समारोह में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक कलाओं और हस्तशिल्प को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की। लोक कलाकारों और साहित्यकारों का अभिनंदन करते हुए धामी ने कहा कि जागर, बेड़ा, मांगल, खुदेड़ जैसे लोकगीत और छोलिया व पांडव नृत्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक आत्मा हैं। इन्हें संरक्षित करना और आगे बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने महोत्सव के सफल आयोजन के लिए संस्था की संस्थापक गीता धामी और आयोजन समिति को साधुवाद दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से स्थानीय वेशभूषा, हस्तशिल्प और व्यंजनों को नजदीक से समझने का अवसर मिलता है। धामी ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को उत्तराखंड में धरातल पर उतारा जा रहा है। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड और ‘एक जनपद, दो उत्पाद’ जैसी योजनाओं से स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल रही है।

राज्य की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा, किसानों की आय बढ़ाने के मामले में उत्तराखंड देश में पहले स्थान पर है। राज्य ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में ‘अचीवर्स’ और स्टार्टअप रैंकिंग में ‘लीडर्स’ की श्रेणी में शामिल हुआ है। नीति आयोग के सतत विकास सूचकांक 2023-24 में भी उत्तराखंड ने देश में प्रथम स्थान हासिल कर अपनी प्रगति को सिद्ध किया है।

पर्यटन और कृषि क्षेत्र की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को बेस्ट वाइल्डलाइफ और बेस्ट एडवेंचर डेस्टिनेशन जैसे राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। हाल ही में मत्स्य विकास और नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में भी उत्तराखंड को सर्वश्रेष्ठ राज्य का सम्मान मिला है। लोक कलाकारों के कल्याण पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि सरकार कलाकारों की सहायता के लिए प्रतिबद्ध है। वृद्ध एवं अस्वस्थ कलाकारों को पेंशन दी जा रही है और गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।

कार्यक्रम में सेवा संकल्प फाउंडेशन की ट्रस्टी गीता धामी ने कहा कि इस महोत्सव का उद्देश्य अपनी जड़ों से जुड़कर युवा पीढ़ी का भविष्य संवारना है। उन्होंने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य में लागू हुए समान नागरिक संहिता और सख्त नकल विरोधी कानून की सराहना की। इस अवसर पर सतपाल महाराज, भगत सिंह कोश्यारी, प्रसून जोशी, कल्पना सैनी, खजान दास, दुर्गेश्वर लाल, अनिल नौटियाल, दीपम सेठ और मधु भट्ट समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

 

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