शिमला। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विनय कुमार ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि भाजपा केंद्रीय बजट और 16वें वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान को बंद किए जाने के संवेदनशील मुद्दे पर गलत तथ्य पेश कर रही है। विनय कुमार का कहना है कि भाजपा नेता अपनी बयानबाजी के जरिए प्रदेश की जनता को गुमराह करने का असफल प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए बजट में हिमाचल प्रदेश की पूरी तरह से अनदेखी की गई है, जिससे राज्य के आगामी विकास कार्यों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
राजस्व घाटा अनुदान को बंद करने के केंद्र के संभावित फैसले को विनय कुमार ने असंवैधानिक करार दिया। उनका तर्क है कि हिमाचल प्रदेश जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले पहाड़ी राज्य के लिए यह अनुदान आर्थिक मजबूती का एक मुख्य आधार रहा है। इसके बिना राज्य की वित्तीय स्थिति को संभालना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिमाचल प्रदेश देश के पर्यावरण संतुलन में बड़ी भूमिका निभाता है। यहाँ के वनों, जल स्रोतों और पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए राज्य को मिलने वाली विशेष आर्थिक मदद जारी रहनी चाहिए। यह प्रदेश द्वारा की जा रही प्राकृतिक सेवाओं के बदले में मिलने वाला अधिकार है, जिसे रोकना राज्य के साथ अन्याय होगा।
आपदा राहत के मुद्दे पर भी कांग्रेस अध्यक्ष ने भाजपा और केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने भाजपा के स्थानीय नेताओं को नसीहत दी कि उन्हें राजनीति करने के बजाय अपनी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के सामने प्रदेश के हितों की पैरवी करनी चाहिए। विनय कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि हिमाचल प्रदेश में आई आपदा के राहत कार्यों के लिए पूर्व में घोषित किए गए 1500 करोड़ रुपये की राशि को केंद्र सरकार तुरंत जारी करे। उन्होंने कहा कि केवल घोषणाओं से धरातल पर बदलाव नहीं आता, प्रदेश को पुनर्निर्माण कार्यों के लिए तत्काल नकद सहायता की आवश्यकता है। भाजपा नेताओं को चाहिए कि वे दिल्ली जाकर इस राशि की मांग करें, न कि राज्य में बैठकर निराधार बयानबाजी करें।
प्रदेश की वर्तमान आर्थिक बदहाली के लिए विनय कुमार ने सीधे तौर पर पिछली भाजपा सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने विरासत में राज्य को 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम कर्ज और 12 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदारियां सौंपी हैं। भाजपा के शासनकाल में हुए वित्तीय कुप्रबंधन के कारण आज प्रदेश की आर्थिक स्थिति बोझ तले दबी हुई है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार की गलतियों का खामियाजा आज राज्य की वर्तमान सरकार और यहाँ की जनता को भुगतना पड़ रहा है।
बावजूद इन चुनौतियों के, विनय कुमार ने दावा किया कि प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार अपने सीमित संसाधनों का कुशलतापूर्वक प्रबंधन कर रही है। भारी कर्ज और प्राकृतिक आपदा की मार के बाद भी राज्य में विकास की गति को थमने नहीं दिया गया है। सरकार ने न केवल आपदा प्रभावित परिवारों का प्रभावी पुनर्वास सुनिश्चित किया, बल्कि उनके हुए नुकसान की भरपाई भी की है। प्रदेश में पुनर्निर्माण के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता यह स्पष्ट रूप से देख रही है कि कैसे एक तरफ केंद्र सरकार मदद रोकने के बहाने ढूंढ रही है और दूसरी तरफ राज्य की सरकार अपने दम पर प्रगति की राह पर अग्रसर है।
अंत में, विनय कुमार ने हिमाचल प्रदेश से चुनकर गए सभी भाजपा सांसदों से एक महत्वपूर्ण अपील की। उन्होंने कहा कि सांसदों को अपनी दलीय विचारधारा और संकीर्ण राजनीति से ऊपर उठकर प्रदेश के व्यापक हित में सोचना चाहिए। उन्हें संसद और केंद्र सरकार के मंचों पर एकजुट होकर हिमाचल के वित्तीय अधिकारों की बात रखनी चाहिए। राजस्व घाटा अनुदान को बहाल करवाना और राज्य के लिए विशेष आर्थिक सहायता प्राप्त करना ही इस समय प्रदेश की सबसे बड़ी जरूरत है। यदि यह अनुदान बंद होता है, तो इससे राज्य के विकास की गति पर ब्रेक लग सकता है। उन्होंने भाजपा सांसदों को याद दिलाया कि वे प्रदेश की जनता के प्रतिनिधि हैं, इसलिए उन्हें केंद्र के समक्ष हिमाचल की आवाज मजबूती से बुलंद करनी चाहिए।
Pls read:Himachal: राजस्व घाटा अनुदान खत्म होने पर हिमाचल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी