चंडीगढ़। पंजाब में आगामी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ और त्रुटिहीन बनाने के उद्देश्य से प्रशासनिक स्तर पर कवायद तेज कर दी गई है। राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने बीती शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और डिप्टी कमिश्नरों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य एजेंडा मतदाता सूचियों (इलेक्टोरल रोल्स) की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करना और उनमें सुधार के लिए जारी विभिन्न गतिविधियों की प्रगति का आकलन करना था। अनिंदिता मित्रा ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची की शुद्धता ही निष्पक्ष चुनाव की नींव है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राज्य के सभी जिलों में चल रही ‘वोंटर मैपिंग’ गतिविधियों का विस्तार से जायजा लिया। उन्होंने जिलावार प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे यह सुनिश्चित करें कि मतदाता सूचनाओं का कवरेज पूरी तरह से व्यवस्थित हो। उन्होंने सटीकता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि मतदाता सूची में नई जानकारियों को समयबद्ध तरीके से अपडेट किया जाना अनिवार्य है। मैपिंग की प्रक्रिया में यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे और सभी भौगोलिक क्षेत्रों का डेटा सही ढंग से दर्ज हो।
मतदाता पंजीकरण और सुधार के लिए प्राप्त होने वाले विभिन्न चुनावी फॉर्मों के निस्तारण की स्थिति पर भी बैठक में गहन चर्चा हुई। अनिंदिता मित्रा ने उन मामलों पर चिंता व्यक्त की जिनमें मतदाताओं की तस्वीरें धुंधली हैं या जिनमें प्रविष्टियां अस्पष्ट और समझ न आने वाली (गिबरिश) हैं। उन्होंने जिला अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि ऐसे सभी दोषपूर्ण मामलों का तुरंत निस्तारण किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि तस्वीरों और डेटा की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए और इन त्रुटियों को सुधारने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के अनुसार ही पूरी की जानी चाहिए।
तकनीकी मोर्चे पर पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ‘ईआरओ नेट’ (ERO Net) पर लंबित आवेदनों के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया गया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अधिकारियों को सचेत किया कि आवेदनों का लंबित रहना मतदाता सूची की अखंडता को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आवेदनों की निरंतर निगरानी करने और उनका तेजी से निपटान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अनिंदिता मित्रा का मानना है कि मतदाता सूची जितनी ‘साफ-सुथरी’ होगी, चुनावी प्रक्रिया के प्रति जनता का विश्वास उतना ही अधिक बढ़ेगा।
बैठक का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू नागरिकों की सुविधाओं और उनकी शिकायतों के निवारण से जुड़ा था। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने ‘ईसीआई नेट’ पर उपलब्ध “बुक ए कॉल” (Book a Call) फीचर के बारे में जन-जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस सुविधा के अंतर्गत, मतदाता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कॉल बुक कर सकते हैं, जिसके बाद बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) उन्हें कॉल-बैक करके सहायता प्रदान करते हैं। अनिंदिता मित्रा ने कहा कि इस फीचर के माध्यम से शिकायतों का पारदर्शी और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सकता है, जिससे मतदाताओं को कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
मतदाता सूची में दोहराव को रोकने के लिए ‘डेमोग्राफिकल सिमिलर एंट्रीज’ (DSE) यानी जनसांख्यिकीय रूप से समान प्रविष्टियों के मामलों की भी समीक्षा की गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिलों को हिदायत दी कि वे ऐसी प्रविष्टियों का सावधानीपूर्वक सत्यापन करें। अक्सर एक ही मतदाता का नाम अलग-अलग स्थानों पर या एक ही स्थान पर दो बार दर्ज हो जाता है, जिसे रोकना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मतदाता का रिकॉर्ड अद्वितीय (यूनिक) होना चाहिए ताकि फर्जी मतदान या डेटा में गड़बड़ी की किसी भी संभावना को खत्म किया जा सके। सत्यापन की यह प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।
बैठक के समापन पर अनिंदिता मित्रा ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि मतदाता सूची को अद्यतन (अपडेट) रखना एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और इसमें तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को फील्ड स्तर पर काम कर रहे बीएलओ के साथ बेहतर तालमेल बनाने के निर्देश दिए ताकि जमीनी स्तर की जानकारी मुख्यालय तक सटीक रूप से पहुंच सके। प्रशासन का लक्ष्य एक ऐसी मतदाता सूची तैयार करना है जो पूरी तरह से त्रुटिमुक्त हो और जिसमें राज्य के हर योग्य नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित हो।
इस समीक्षा बैठक के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि पंजाब के सभी जिलों में मतदाता सूची सुधार अभियान में और तेजी आएगी। निर्वाचन विभाग का यह प्रयास न केवल डेटा की गुणवत्ता में सुधार लाएगा, बल्कि भविष्य में होने वाले चुनावों की शुचिता को भी बरकरार रखेगा। अनिंदिता मित्रा ने सभी अधिकारियों को एक निर्धारित समय सीमा के भीतर इन सभी सुधारों को पूरा करने और अपनी अगली रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। चुनाव आयोग की इस सक्रियता से यह स्पष्ट है कि राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल समाधानों और व्यक्तिगत सत्यापन को समान रूप से महत्व दिया जा रहा है।
Pls read:Punjab: पंजाब सरकार का बड़ा फैसला अनाथ और दृष्टिबाधित छात्रों के लिए तकनीकी शिक्षा हुई मुफ्त