देहरादून, 31 जनवरी।
उत्तराखंड की राजनीति में शनिवार को एक बेहद सुखद और आत्मीय तस्वीर देखने को मिली, जो आपसी सम्मान और शिष्टाचार की एक नई मिसाल बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत के डिफेंस कॉलोनी स्थित आवास पर पहुंचकर उनसे शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात न केवल राजनीतिक सौहार्द का प्रतीक रही, बल्कि इसके माध्यम से राज्य की समृद्ध परंपराओं और आपसी रिश्तों की प्रगाढ़ता को भी संदेश दिया गया।
इस मुलाकात के दौरान पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठ नेता हरीश रावत का हाल-चाल जाना और उनके स्वास्थ्य के विषय में चर्चा की। मुख्यमंत्री ने रावत के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की मंगल कामना की। राजनीतिक विचारधाराओं में भिन्नता होने के बावजूद, सार्वजनिक जीवन में एक-दूसरे के प्रति इस प्रकार का सम्मान और अपनत्व उत्तराखंड की विशिष्ट संस्कृति का हिस्सा रहा है, जिसे इन दोनों नेताओं ने एक बार फिर जीवंत कर दिया।
इस शिष्टाचार भेंट की सबसे विशेष बात वह भेंट रही, जो पुष्कर सिंह धामी अपने साथ लेकर आए थे। मुख्यमंत्री ने अपने निजी खेत में उत्पादित चावल का एक पैकेट हरीश रावत को उपहार स्वरूप भेंट किया। यह उपहार केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि इसके पीछे एक गहरा संदेश छिपा था। धामी ने इस अवसर पर कहा कि ये चावल राज्य के परिश्रमी किसानों की मेहनत और उत्तराखंड की उपजाऊ मिट्टी की पहचान हैं। अपने स्वयं के खेत की उपज को भेंट करना स्थानीय उत्पादों के प्रति उनके लगाव और राज्य की कृषि परंपरा के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
पुष्कर सिंह धामी के इस आत्मीय और स्नेहपूर्ण व्यवहार की हरीश रावत ने भी मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए इस उपहार को सहर्ष स्वीकार किया और उनके इस शिष्टाचार के प्रति आभार व्यक्त किया। रावत ने कहा कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन इस तरह का व्यक्तिगत व्यवहार और आपसी मेल-मिलाप लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूती प्रदान करता है। उन्होंने धामी के इस कदम को राजनीतिक सद्भाव का एक सुंदर उदाहरण बताया और उनके प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की।
राजनीतिक गलियारों में इस भेंट को काफी सकारात्मक रूप में देखा जा रहा है। आमतौर पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच कड़वाहट और विवादों की खबरें ही चर्चा में रहती हैं, लेकिन ऐसे पल समाज को यह संदेश देते हैं कि मानवीय मूल्य और शिष्टाचार राजनीति से कहीं ऊपर हैं। मुख्यमंत्री का अपने खेत की उपज लेकर एक वरिष्ठ नेता के पास जाना यह भी दर्शाता है कि वे अपनी जड़ों और कृषि से जुड़े कार्यों के प्रति कितने सजग हैं। इस मुलाकात ने न केवल दोनों नेताओं के बीच की व्यक्तिगत निकटता को दर्शाया, बल्कि राज्य के स्थानीय उत्पादों और खेती-किसानी के प्रति आम जनता का ध्यान भी आकर्षित किया है। यह भेंट लंबे समय तक उत्तराखंड की राजनीति में मर्यादा और सौहार्द की एक प्रेरक घटना के रूप में याद रखी जाएगी।