वाराणसी।
प्रयागराज से शुरू हुआ धार्मिक और राजनीतिक विवाद अब वाराणसी पहुंच गया है। काशी आगमन के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने शासन द्वारा उनकी शंकराचार्य पद की प्रमाणिकता मांगे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उनका प्रमाण पत्र तो मांग लिया गया, लेकिन अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को स्वयं के हिंदू होने का प्रमाण देना होगा।
अविमुक्तेश्वरानंद ने एक औपचारिक पत्र जारी करते हुए कहा कि वर्तमान समय धर्म और सत्ता की निर्णायक परीक्षा का दौर है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्र भारत में गोमाता की रक्षा और गोहत्या बंदी कानून की मांग करना सबसे बड़ा अपराध बन गया है। उन्होंने 1966 के दिल्ली गोरक्षा आंदोलन का स्मरण कराते हुए कहा कि तत्कालीन सरकार ने गोभक्तों और संतों पर गोलियां चलवाई थीं। उन्होंने धर्मसम्राट करपात्री के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भी उसी आवाज को बुलंद करने के कारण उन पर और उनके सहयोगियों पर विभिन्न प्रकार के अत्याचार किए जा रहे हैं।
शंकराचार्य ने सीधा आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ अपने विश्वासपात्रों, जैसे रामभद्राचार्य के माध्यम से उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्मसत्ता किसी प्रशासनिक प्रमाण पत्र की मोहताज नहीं होती, बल्कि अब सत्ता को अपनी धार्मिक निष्ठा सिद्ध करनी होगी। उन्होंने कहा कि हिंदू होना केवल भाषण देने या भगवा वस्त्र पहनने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी वास्तविक कसौटी गो-सेवा और धर्म की रक्षा है।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष कुछ कड़ी शर्तें और मांगें रखीं। उनकी मुख्य मांग है कि गोमाता को उत्तर प्रदेश में ‘राज्यमाता’ का आधिकारिक दर्जा दिया जाए, जैसा कि हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने किया है। उन्होंने नेपाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां गाय राष्ट्रीय पशु है, उसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी इसे सम्मान मिलना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश की धरती से होने वाले हर प्रकार के मांस निर्यात पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की।
सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए अविमुक्तेश्वरानंद ने दावा किया कि भारत के कुल मांस निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से भी अधिक है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या रामराज्य का सपना गायों के रक्त से अर्जित विदेशी मुद्रा पर आधारित होगा? उन्होंने आरोप लगाया कि भैंस के मांस के नाम पर एक बड़ा षड्यंत्र चल रहा है। बिना डीएनए परीक्षण के भैंस के मांस की आड़ में गोवंश को काटा और निर्यात किया जा रहा है। उन्होंने सांख्यिकीय विसंगति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य में भैंसों की संख्या और निर्यात किए जा रहे मांस की मात्रा में भारी अंतर है, जो सरकार की मौन स्वीकृति की ओर इशारा करता है।
अंत में, उन्होंने शासन को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन 40 दिनों के भीतर गोमाता को राज्यमाता का दर्जा और मांस निर्यात बंदी का आदेश जारी नहीं हुआ, तो परिणाम गंभीर होंगे। उन्होंने घोषणा की कि यदि 40 दिन बीत गए, तो आगामी 10 से 19 मार्च तक लखनऊ में संतों का बड़ा समागम होगा, जहां वे योगी आदित्यनाथ को ‘नकली हिंदू’ घोषित करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि जो सरकार गोवंश की रक्षा नहीं कर सकती, उसे हिंदू कहलाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
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