शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नए साल के आगमन के साथ ही एक बड़ा और सख्त बदलाव लागू कर दिया गया है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों में अनुशासन और पढ़ाई का माहौल बेहतर बनाने के लिए छात्रों द्वारा मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, हेडफोन, टैबलेट, आईपैड, म्यूजिक प्लेयर और हैंड हेल्ड गेमिंग डिवाइस लाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। यह नियम ग्रीष्मकालीन अवकाश वाले स्कूलों में गुरुवार से ही प्रभावी हो गया है जबकि शीतकालीन अवकाश वाले स्कूलों में यह 13 फरवरी को स्कूल खुलने के साथ लागू होगा।
नियमों का उल्लंघन करने पर छात्रों को खामियाजा भुगतना पड़ेगा। अगर कोई छात्र इन उपकरणों को लेकर स्कूल आता है तो उन्हें तुरंत जब्त कर लिया जाएगा। इसके अलावा विभाग ने आर्थिक दंड के रूप में जुर्माना लगाने का प्रावधान भी किया है। यह कदम छात्रों में मोबाइल की बढ़ती लत और पढ़ाई से भटकने की समस्या को देखते हुए उठाया गया है।
केवल छात्र ही नहीं बल्कि शिक्षकों के लिए भी कड़े नियम बनाए गए हैं। शिक्षकों को कक्षा, प्रयोगशाला, परीक्षा या किसी भी शैक्षणिक गतिविधि के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग न करने की सलाह दी गई है। उन्हें मोबाइल का इस्तेमाल केवल डिजिटल शिक्षण सामग्री, उपस्थिति दर्ज करने, लर्निंग ऐप्स और आधिकारिक स्कूल कार्यों के लिए ही करने की छूट होगी। स्कूल के समय में शिक्षकों को अपना फोन साइलेंट मोड पर रखना अनिवार्य होगा।
बिना अनुमति के इंटरनेट मीडिया, गेमिंग या मनोरंजन से जुड़े कंटेंट का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही छात्रों की फोटो या वीडियो रिकॉर्डिंग भी बिना परमिशन के नहीं की जा सकेगी। अगर कोई शिक्षक इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
निदेशक स्कूल शिक्षा विभाग आशीष कोहली ने बताया कि बच्चों में मोबाइल फोन की लत गंभीर होती जा रही है जो पढ़ाई से दूरी बढ़ाने का बड़ा कारण है। इसके अलावा साइबर बुलिंग, सेक्सटिंग और डेटा प्राइवेसी उल्लंघन जैसी घटनाओं में वृद्धि भी सरकार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इन निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू कराने की जिम्मेदारी स्कूल के प्रधानाचार्य और मुख्य अध्यापक की होगी। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से स्कूलों में अनुशासन और मानसिक सामाजिक विकास को मजबूती मिलेगी।