Punjab: हरित क्रांति के बाद अब प्रदूषण रहित स्टील बनाने के क्षेत्र में क्रांति का आधार बाँधेगा पंजाब

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  • मुख्यमंत्री के प्रयासों स्वरूप उत्तरी भारत का अपनी किस्म का पहला ग्रीन स्टील प्लांट लुधियाना में लगाया
  • 115 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में फैला यह प्रोजैक्ट 2600 करोड़ रुपए की लागत से किया स्थापित
  • टाटा स्टील द्वारा प्रोजैक्ट सम्बन्धी समय पर मंज़ूरियां देने के लिए मुख्यमंत्री का दिल से धन्यवाद

लुधियाना, 20 अक्तूबरः

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के ठोस प्रयासों स्वरूप विश्व की प्रमुख कारोबारी कंपनी टाटा स्टील ने लुधियाना में 2600 करोड़ रुपए के प्रस्तावित निवेश से उत्तरी भारत का अपनी किस्म का पहला ग्रीन स्टील प्लांट स्थापित किया है।
मुख्यमंत्री द्वारा आज इस प्लांट का नींव पत्थर रखा गया जिससे यह प्लांट कंपनी के फलैगशिप रिटेल ब्रांड ’टाटा टिसकोन’ के अधीन रीसाइक्लिंग के ज़रिये निर्माण में इस्तेमाल किये जाते स्टील के सरिया का उत्पादन करेगा और यह निवेश टाटा स्टील की अर्थव्यवस्था के प्रति वचनबद्धता को दर्शाने के साथ-साथ स्टील को रीसाईकल करके प्रदूषण रहित स्टील तैयार करने में सहायक होगा। 100 प्रतिशत स्क्रैप-आधारित इलेक्ट्रिक भट्टी के साथ 0. 75 एम. टी. पी. ए. के सामर्थ्य वाला यह प्लांट कड्याना खुर्द, हाई-टेक वैली में 115 एकड़ ज़मीन में स्थापित होना है। इस प्रोजैक्ट के ज़रिये रोज़गार के लगभग 500 प्रत्यक्ष और 2000 अप्रत्यक्ष मौके पैदा होने की संभावना है।
पंजाब के मंडी गोबिन्दगढ़ और लुधियाना में 200 से अधिक स्टील रोलिंग मिलें और मुख्य कलस्टर हैं जिससे राज्य का स्टील और अलॉइस सैक्टर में महत्वपूर्ण स्थान है। राज्य में वर्धमान स्पेशल स्टीलज़, आरती स्टीलज़, हीरो स्टीलज़, जे. एस. डब्ल्यू स्टीलज़ और अन्य जैसी प्रमुख स्टील इकाईयाँ हैं और इस सैक्टर को औद्योगिक व्यापार विकास नीति-2022 में पंसदीदा सैक्टर के तौर पर दर्शाया गया है। टाटा स्टील लिमटिड का पंजाब के स्टील और अलॉइस सैक्टर में अहम स्थान है और 34 मिलियन टन कच्चे स्टील के सालाना सामर्थ्य के साथ विश्व स्तरीय स्टील कंपनियों में शुमार है।
अपने संबोधन में टाटा स्टीलज़ के सी. ई. ओ. और एम. डी. टी. वी. नरेंदरन ने प्लांट स्थापित करने सम्बन्धी सभी मनज़ूरियां निर्धारित और समयबद्ध ढंग के साथ देने के लिए मुख्यमंत्री का दिल से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह प्लांट आने वाले 18 महीनों में कार्यशील हो जायेगा। श्री नरेंदरन ने बताया कि पंजाब ने देश में हरित क्रांति लाने में मुख्य भूमिका निभाई थी और अब यह प्रदूषण रहित स्टील बनाने के क्षेत्र में क्रांति लायेगा।
इस दौरान टाटा स्टील के उप प्रधान (कॉर्पोरेट सर्विसिज) चाणक्य चौधरी ने राज्य सरकार का धन्यवाद करते हुये कहा कि उनको इस प्रोजैक्ट के लिए समय पर मंज़ूरी मिल गई है। उन्होंने नजदीकी गाँवों के पंचों- सरपंचों का भी इस प्रोजैक्ट को पूरा करने के लिए भरपूर सहयोग देने के लिए धन्यवाद किया। अपने आप को पंजाब का हिस्सा बताते हुये श्री चौधरी ने कहा कि नौजवानों को मानक तकनीकी शिक्षा देने के लिए राज्य में हुनर प्रशिक्षण केंद्र खोलेंगे।
टाटा स्टील के चेयरमैन एम एंड यह ( लौंग प्रोडक्टस) आशीष अनुपम ने अपने संबोधन में कहा कि यह प्लांट वातावरण को प्रदूषित किये बिना 7500 टन स्टील का उत्पादन करने का सामर्थ्य रखता है। उन्होंने बताया कि इस विलक्षण प्लांट में स्क्रैप को रीसाईकल करके स्टील बनाया जायेगा। श्री अनुपम ने कहा कि इस प्लांट में उत्पादन के लिए कोयले का प्रयोग नहीं किया जायेगी, जिससे यह ग्रीन पावर को उत्साहित करेगा।

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