अमृतसर। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने देश की सुरक्षा में सेंध लगाने की एक बड़ी साजिश को नाकाम करते हुए तरनतारन के दो युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपी अरमान सिंह और सन्नी पर आरोप है कि वे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के लिए जासूसी कर रहे थे और भारतीय सैन्य ठिकानों की संवेदनशील जानकारी साझा कर रहे थे। पुलिस हिरासत में हुई शुरुआती पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिससे सुरक्षा तंत्र में हड़कंप मच गया है।
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि अरमान सिंह और सन्नी ने अमृतसर स्थित खासा छावनी, पठानकोट सैन्य क्षेत्र और अन्य महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकानों की 30 से अधिक तस्वीरें अपने पाकिस्तानी हैंडलर को भेजी थीं। इन तस्वीरों के माध्यम से वे भारतीय सेना की गोपनीय गतिविधियों और बुनियादी ढांचे की जानकारी सीमा पार पहुंचा रहे थे। सोमवार को अमृतसर देहात पुलिस के सीआइए स्टाफ ने दोनों आरोपियों से विस्तार से पूछताछ की। इस दौरान देश की विभिन्न खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के उच्चाधिकारी भी मौजूद रहे। संयुक्त पूछताछ का यह दौर लगभग चार घंटे तक चला, जिसमें आरोपियों के पूरे नेटवर्क और उनके पाकिस्तानी संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की गई।
जांच के प्रमुख बिंदु और तकनीकी साक्ष्य
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपियों के पास से बरामद तीन मोबाइल फोनों को फोरेंसिक जांच के लिए लैब भेज दिया है। पुलिस का मानना है कि आरोपियों ने पाकिस्तानी हैंडलर को डेटा भेजने के बाद सबूत मिटाने के लिए उसे अपने फोन से डिलीट कर दिया होगा। फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम इन फोनों से डिलीट किए गए डेटा, चैट्स और तस्वीरों को रिकवर करने का प्रयास करेगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में कितनी और किस स्तर की संवेदनशील जानकारी लीक की गई है।
| पुलिस जांच की वर्तमान स्थिति | विवरण और उद्देश्य |
| फोरेंसिक विश्लेषण | मोबाइल से डिलीट किए गए डेटा, फोटो और चैट की रिकवरी करना। |
| कॉल रिकॉर्ड (CDR) | पिछले छह महीनों के कॉल डंप का बारीकी से विश्लेषण करना। |
| लोकेशन मैपिंग | यह पता लगाना कि आरोपी कितनी बार सीमावर्ती इलाकों में गए। |
| संपर्क नेटवर्क | जासूसी के इस खेल में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान करना। |
पुलिस अब आरोपियों के तीनों मोबाइल नंबरों का कॉल डंप और लोकेशन हिस्ट्री निकलवा रही है। इससे यह पता चल सकेगा कि पिछले छह महीनों के दौरान ये दोनों कितनी बार सीमावर्ती इलाकों या संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों के करीब पहुंचे थे। साथ ही, जांच अधिकारी यह भी खंगाल रहे हैं कि इस अवधि के दौरान वे किन-किन लोगों के निरंतर संपर्क में रहे और क्या उनके इस स्थानीय नेटवर्क में कुछ और लोग भी शामिल हैं।
सुरक्षा एजेंसियां इस बात की भी गहराई से जांच कर रही हैं कि जासूसी के इस काम के बदले उन्हें सीमा पार से कोई आर्थिक लाभ पहुंचाया गया था या नहीं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों का मोबाइल रिकॉर्ड कई राज खोल सकता है। फिलहाल दोनों आरोपियों से सघन पूछताछ जारी है और सुरक्षा एजेंसियां इस मामले के हर पहलू को खंगाल रही हैं ताकि देश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता किया जा सके। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और चौंकाने वाले खुलासे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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