US: मध्य पूर्व में बड़ा फेरबदल, जार्ज वाशिंगटन लेगा यूएसएस अब्राहम लिंकन की जगह

वाशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने अपने समुद्री बेड़े में एक बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। लंबे समय से मिडिल ईस्ट में तैनात विमानवाहक पोत ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ को अब वापस बुलाया जा रहा है और उसकी जगह ‘यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन’ को तैनात किया जा रहा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अब्राहम लिंकन पर तैनात लगभग 5,000 नौसैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य और जहाज की जर्जर स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

असामान्य तैनाती और सैनिकों का मानसिक तनाव
रिपोर्ट्स के अनुसार, यूएसएस अब्राहम लिंकन पिछले 250 से अधिक दिनों से समुद्र में तैनात है। इस असामान्य रूप से लंबी अवधि ने चालक दल के सदस्यों पर गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव डाला है। सांसदों और नाविकों के परिवारों ने उन सूचनाओं पर चिंता जताई है जिनमें कहा गया है कि सैनिक गंभीर मानसिक आघात से गुजर रहे हैं और वहां आत्महत्या की कोशिशों जैसे मामले भी सामने आए हैं।

विमानवाहक पोत पर जीवन की स्थितियां भी बदतर बताई जा रही हैं। जहाज पर दूषित पेयजल, भोजन की भारी किल्लत और टूटे हुए टॉयलेट्स जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इन्हीं चिंताओं के बीच, अमेरिका ने अब फाइटर जेट्स को ले जाने में सक्षम जंगी जहाज जॉर्ज वाशिंगटन को भेजने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

यूएसएस अब्राहम लिंकन का सफरनामा
• रवानगी: 21 नवंबर को सैन डिएगो से प्रशांत क्षेत्र के लिए रवाना हुआ था।
• मोर्चा परिवर्तन: 28 फरवरी को ईरान के साथ युद्ध शुरू होने पर इसे मिडिल ईस्ट की ओर मोड़ दिया गया।
• रिकॉर्ड तैनाती: पिछले 200 से अधिक दिनों से यह पोत किसी भी बंदरगाह पर नहीं रुका है।
• चुनौती: लगातार अभियानों के कारण नौसेना की संचालन क्षमता की यह कड़ी परीक्षा बन गई है।

जॉर्ज वाशिंगटन की आवाजाही
सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने वाले अधिकारियों का कहना है कि यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन वर्तमान में हिंद महासागर की ओर तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में यह पोत वियतनाम के दा नांग से रवाना हुआ और सिंगापुर व मलक्का जलडमरूमध्य को पार कर चुका है। वाशिंगटन की तैनाती को मध्य पूर्व में अमेरिकी हितों की सुरक्षा और ईरान के प्रति सैन्य दबाव बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नौसेना और प्रशासन का पक्ष
हालांकि, अमेरिकी नौसेना और रक्षा अधिकारियों ने इन दावों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है कि यह फेरबदल बदहाली की वजह से हो रहा है। नौसेना ने इसे एक ‘नियमित रोटेशन’ का हिस्सा बताया है। नौसेना के बयानों में कहा गया है कि जहाज पर आत्महत्या के प्रयासों में कोई वृद्धि नहीं हुई है और वहां नाविकों को डॉक्टरों के साथ-साथ स्वच्छ जल और पौष्टिक भोजन की सुविधा मिल रही है।

विवाद और सच्चाई: एक नजर
• रिपोर्ट: जहाज पर दूषित पानी और टूटे टॉयलेट्स की वजह से सैनिक परेशान हैं।
• प्रशासन का रुख: रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने खराब स्थितियों की खबरों को पूरी तरह गलत बताया है।
• आपूर्ति संकट: नौसेना ने स्वीकार किया है कि युद्ध के कारण आपूर्ति केंद्रों में बाधा आई है, जिससे रसद और डाक पहुंचने में देरी हुई है।

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह बदलाव रणनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है। जहाँ एक तरफ प्रशासन खराब स्थितियों को नकार रहा है, वहीं दूसरी तरफ आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधा को स्वीकार करना यह संकेत देता है कि युद्धग्रस्त क्षेत्रों में लंबे समय तक रहने से सैनिकों और संसाधनों पर दबाव बढ़ा है। अब यह देखना होगा कि यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन के पहुंचने के बाद इस क्षेत्र के सैन्य समीकरणों में क्या नया मोड़ आता है।

 

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