वाशिंगटन। अमेरिका अब ईरान के साथ चल रहे लंबे सैन्य संघर्ष को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक रास्ते तलाश रहा है। अमेरिकी सेना के वरिष्ठ जनरलों का स्पष्ट मानना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उद्देश्यों को केवल हवाई हमलों के जरिए पूरा नहीं किया जा सकता है। खुफिया और सैन्य हलकों में इस बात को लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है कि केवल बमबारी के दबाव से ईरान को पूरी तरह झुकाना मुमकिन नहीं होगा।
जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन कैन ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ निजी चर्चा में यह बात स्पष्ट की है कि अमेरिका को अब इस संघर्ष से बाहर निकलने की जरूरत है। उन्होंने चेतावनी दी है कि सैन्य कार्रवाई को और अधिक बढ़ाने से सकारात्मक परिणाम के बजाय उल्टा असर हो सकता है। कैन के अनुसार, यह रणनीति वाशिंगटन की शर्तों पर तेहरान को समझौते के लिए मजबूर करने में विफल साबित हो सकती है।
| होरमुज जलडमरूमध्य और वैश्विक अर्थव्यवस्था |
| ईरान के साथ जारी इस तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर चल रही बातचीत में प्रगति हुई है। होरमुज वैश्विक तेल शिपमेंट का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि यदि यह गतिरोध जल्द खत्म होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में गिरावट आएगी, जिससे अमेरिकी और वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी। |
सुरक्षा टीम के साथ मंथन
डैन कैन ने अपनी यह चिंता डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के प्रमुख सदस्यों के सामने प्रमुखता से रखी है। इस चर्चा में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ जैसे प्रमुख नेता शामिल रहे। इन बैठकों का मुख्य केंद्र सैन्य विकल्पों की सीमाएं और जोखिम रहे हैं। अमेरिकी सेना का प्रयास है कि किसी भी स्थिति में ईरान में अमेरिकी जमीनी सैनिकों को भेजने की नौबत न आए।
प्रशासन के भीतर इस बात पर मंथन चल रहा है कि हवाई हमले वास्तव में इस संघर्ष को समाधान की ओर ले जाएंगे या इसे और अधिक उलझा देंगे। डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से ईरान में अमेरिकी जमीनी बलों की तैनाती का विरोध करते रहे हैं। उनका मानना है कि लगातार बमबारी के दबाव में तेहरान उनकी शर्तों को स्वीकार कर लेगा, लेकिन डैन कैन और अन्य सैन्य विशेषज्ञों का निजी तौर पर तर्क है कि जमीनी हकीकत में ऐसे नतीजों की उम्मीद बहुत कम है।
| नया क्षेत्रीय रक्षा गठबंधन और ईरान की प्रतिक्रिया |
| ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच उसके पड़ोसी देशों ने अपनी सुरक्षा के लिए नया मोर्चा तैयार किया है। सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत किसी भी एक देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। यह गठबंधन सऊदी अरब के आर्थिक प्रभाव, पाकिस्तान की सैन्य क्षमता और तुर्की के आधुनिक रक्षा उद्योग को एक साथ लाता है। हालांकि, ईरानी सांसद इब्राहिम रेजाई ने इस गुटबंदी की आलोचना करते हुए कहा है कि यह गठबंधन सऊदी अरब को स्थायी सुरक्षा प्रदान नहीं कर पाएगा। |
आर्थिक और क्षेत्रीय परिणाम
यह चिंताएं ऐसे समय में सामने आई हैं जब इस संघर्ष के कारण व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा मंडरा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि ईरान से जुड़ी बातचीत में सकारात्मक दिशा मिल रही है और यह महत्वपूर्ण जलमार्ग जल्द ही स्थिर हो सकता है। ऊर्जा बाजार के जानकारों का भी मानना है कि होरमुज में कोई भी लंबा व्यवधान वैश्विक तेल आपूर्ति को ठप कर सकता है, जिससे दुनिया भर में महंगाई का संकट गहरा सकता है।
कुल मिलाकर, वाशिंगटन इस समय एक दोराहे पर खड़ा है। एक ओर जहां ट्रंप प्रशासन सैन्य दबाव के जरिए अपनी बात मनवाना चाहता है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी सैन्य नेतृत्व एक और लंबी और अनिश्चित लड़ाई के जोखिमों से चिंतित है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक वार्ताओं की प्रगति ही यह तय करेगी कि यह संघर्ष विराम की ओर बढ़ेगा या पश्चिम एशिया में अस्थिरता का एक नया दौर शुरू होगा।
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