शिमला। हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार के गठन के लगभग पौने चार साल बाद आखिरकार कुल्लू जिले को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिलने जा रहा है। कुल्लू विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक सुंदर सिंह ठाकुर का मंत्री बनना अब पूरी तरह तय माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, वे आगामी 21 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र से पहले मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। इस नए राजनीतिक घटनाक्रम के साथ ही प्रदेश में विधानसभा उपाध्यक्ष पद को लेकर भी रस्साकशी तेज हो गई है।
कुल्लू जिले को कैबिनेट में स्थान देने का यह निर्णय क्षेत्रीय संतुलन और आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए लिया गया है। गौरतलब है कि इससे पूर्व वीरभद्र सरकार (2012-17) के दौरान भी कुल्लू जिले को मंत्री पद के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा था। उस समय सरकार बनने के करीब ढाई साल बाद कर्ण सिंह को आयुर्वेद मंत्री के रूप में कैबिनेट में शामिल किया गया था।
उपाध्यक्ष पद के लिए भी मची होड़
सुंदर सिंह ठाकुर के मंत्री बनने की चर्चाओं के बीच विधानसभा उपाध्यक्ष की खाली कुर्सी के लिए भी लॉबिंग शुरू हो गई है। इस दौड़ में पालमपुर से विधायक आशीष बुटेल का नाम सबसे आगे चल रहा है। हालांकि, ज्वालामुखी से विधायक संजय रतन को भी इस पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। पार्टी आलाकमान और सरकार इन नियुक्तियों के माध्यम से विभिन्न जिलों और गुटों को साधने की कोशिश कर रही है।
| वर्तमान कैबिनेट की जिलावार स्थिति |
| • हमीरपुर: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू |
| • ऊना: उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री |
| • शिमला: तीन कैबिनेट मंत्री |
| • कांगड़ा: दो कैबिनेट मंत्री |
| • सोलन, सिरमौर, बिलासपुर और किन्नौर: एक-एक मंत्री |
इन जिलों की अब तक रही अनदेखी
वर्तमान में हिमाचल मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सहित कुल 11 सदस्य हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों की कैबिनेट में अब तक अनदेखी हुई है। मंडी, लाहौल-स्पीति, चंबा और कुल्लू से वर्तमान में कोई भी मंत्री नहीं है। हालांकि, चंबा जिले के पास विधानसभा अध्यक्ष का महत्वपूर्ण पद है। सुंदर सिंह ठाकुर की नियुक्ति से कुल्लू का यह सूखा अब समाप्त होने जा रहा है।
| शिमला संसदीय क्षेत्र का दबदबा |
| हिमाचल सरकार और कांग्रेस संगठन में फिलहाल शिमला संसदीय क्षेत्र का पलड़ा सबसे भारी नजर आता है। इस संसदीय क्षेत्र से वर्तमान में पांच मंत्री हैं। साथ ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार और संगठन महासचिव विनोद जिंटा भी इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव (मीडिया) नरेश चौहान, ओएसडी रितेश कपरेट, गोपाल शर्मा और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कई महत्वपूर्ण पदाधिकारी भी इसी क्षेत्र से संबंध रखते हैं। |
विभागों में फेरबदल की संभावना
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नए मंत्री की नियुक्ति केवल एक ताजपोशी नहीं होगी, बल्कि इसके बाद सरकार में बड़ा प्रशासनिक बदलाव भी देखने को मिल सकता है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों के विभागों में फेरबदल की पूरी संभावना है। यह फेरबदल मानसून सत्र की समाप्ति के बाद किया जा सकता है। सरकार का प्रयास है कि इस विस्तार के जरिए उन क्षेत्रों की नाराजगी दूर की जाए जहां से फिलहाल कोई मंत्री नहीं है, ताकि आगामी चुनावों में पार्टी की पकड़ मजबूत बनी रहे। फिलहाल सभी की नजरें शपथ ग्रहण समारोह की आधिकारिक तिथि पर टिकी हैं।
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